कोरबा, 26 जनवरी 2026 | छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा जिले में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अपनी बर्खास्तगी से आहत एक नगर सैनिक (होमगार्ड) ने जहर सेवन कर आत्महत्या की कोशिश की।
घटना के बाद प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है। आनन-फानन में जवान को गंभीर अवस्था में मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।
CG Education Department : बायोमेट्रिक डिवाइस की मांग, शिक्षक जवाबदेही से बचने की रणनीति?
कलेक्ट्रेट परिसर में दिया घटना को अंजाम
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित नगर सैनिक पिछले कुछ समय से विभागीय प्रताड़ना और अपनी बर्खास्तगी को लेकर बेहद मानसिक तनाव में था। सोमवार को वह कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा और वहां उसने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। जहर का असर होते ही वह वहीं गिर पड़ा। वहां मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने जब उसे देखा, तो तत्काल अधिकारियों को सूचित किया गया और उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
सुसाइड नोट में खोले प्रताड़ना के राज
घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद होने की खबर है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
-
सूत्रों के अनुसार, जवान ने अपने पत्र में विभाग के कुछ अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना (Mental Harassment) का सीधा आरोप लगाया है।
-
नोट में लिखा है कि उसे बिना किसी ठोस वजह या गलत तरीके से नौकरी से बर्खास्त (Dismiss) किया गया, जिसके कारण उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल: महिला जवानों की शिकायत
यह मामला सिर्फ एक जवान तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि जिस विभाग और जिन अधिकारियों पर आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ पूर्व में महिला नगर सैनिकों (Female Home Guards) ने भी प्रताड़ना की शिकायतें की थीं। उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, यह अब जांच का विषय है। लेकिन इस नई घटना ने यह साबित कर दिया है कि विभाग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच
इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और सुसाइड नोट को जांच के दायरे में लिया गया है। अस्पताल में जवान का इलाज जारी है, और डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। वहीं, जिला प्रशासन पर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भारी दबाव है।