बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ
कार्यक्रम का आयोजन लालबाग मैदान में किया गया। राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन की शुरुआत मां दंतेश्वरी के जयघोष से की। मैदान में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार मौजूद थे। ढोल-मांदर की आवाज गूंज रही थी। माहौल उत्सव का था। राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय परंपराओं को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
शिक्षा पर राष्ट्रपति का सीधा संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आदिवासी बालिकाओं को पढ़ाना समाज की जिम्मेदारी है। स्कूल तक पहुंच, पढ़ाई में निरंतरता और परिवार का सहयोग जरूरी है। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि शिक्षा से ही आदिवासी समाज आत्मनिर्भर बनेगा और आगे बढ़ेगा।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर बस्तर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। सुबह से ही सिरहासार चौक से लालबाग मार्ग तक पुलिस बल तैनात रहा।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
“राष्ट्रपति का संदेश सीधे दिल तक पहुंचा। अगर हमारी बेटियां पढ़ेंगी तो बस्तर बदलेगा।”
— सोमनाथ कश्यप, स्थानीय निवासी, जगदलपुर
आगे क्या
बस्तर पंडुम-2026 का आयोजन अगले कुछ दिनों तक चलेगा। इसमें जनजातीय नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक खेल और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी होगी। जिला प्रशासन ने दर्शकों से तय मार्गों का उपयोग करने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।