- बड़ा दावा: पूर्व सीएम भूपेश बघेल को मिला था बीजेपी की ‘टीम’ में शामिल होने का न्योता।
- प्रेशर टैक्टिक्स: ‘कमिटमेंट’ न देने के 8-10 दिन के भीतर ही टीम पर पड़ती थी ईडी/आईटी की रेड।
- स्ट्रेटेजी: कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट ‘दिल से’ में किया पावर-प्ले का खुलासा।
रायपुर/नई दिल्ली — छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने राजनीति के मैदान में एक जबरदस्त बाउंसर फेंकी है। बघेल का दावा है कि केंद्र की सत्ताधारी (भाजपा) ने उन्हें अपनी जर्सी पहनने का सीधा ऑफर दिया था। जब उन्होंने इस ‘ट्रांसफर डील’ को ठुकरा दिया, तो उनके डिफेंस को तोड़ने के लिए जांच एजेंसियों के जरिए लगातार हमले किए गए।
भूपेश बघेल ने बताया कि उन्हें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीटिंग के लिए बुलाया। शुरुआत में यह एक रूटीन मुलाकात लगी, लेकिन जल्द ही गेमप्लान समझ आ गया। बघेल के मुताबिक, मुलाकातों के दौरान उनसे पूछा जाता था कि कौन से अधिकारी उनके भरोसेमंद हैं और उन पर कौन से केस चल रहे हैं।
बघेल ने अपनी पारी को संभालते हुए साफ कर दिया कि वह विपक्ष की टीम के कप्तान हैं और सरकार की आलोचना करना उनका धर्म है। लेकिन असली एक्शन मीटिंग के बाद शुरू होता था। बघेल का दावा है कि हर मुलाकात से लौटने के 8 से 10 दिन के भीतर उनके ठिकानों पर छापेमारी शुरू हो जाती थी।
पूर्व सीएम ने एक रोचक वाकया साझा किया। जब एक तरफ मदद की बात हुई और दूसरी तरफ छापेमारी, तो उन्होंने सीधा प्रधानमंत्री को फोन लगा दिया। बघेल ने पीएम से कहा, “आपने तो मदद की बात कही थी, लेकिन यहां तो रेड पड़ गई।” जवाब में प्रधानमंत्री ने सिर्फ इतना कहा कि वे इस मामले में अधिकारियों से बात करेंगे।
“शुरुआत में मुझे समझ नहीं आया कि भाजपा में आने का इशारा है। उन्होंने कभी सीधे तौर पर नहीं कहा, लेकिन जब भी मैं बिना कोई ‘कमिटमेंट’ दिए लौटता, 4-5 दिन में छापे पड़ने लगते थे।”
— भूपेश बघेल (कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट में)
इस पॉडकास्ट में बघेल के बेटे चैतन्य भी मौजूद थे, जो इस राजनीतिक मुकाबले के गवाह रहे हैं। बघेल के इन दावों ने छत्तीसगढ़ की राजनीतिक लीग में खलबली मचा दी है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एक ‘काउंटर-अटैक’ है।