‘एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक हथियार की तरह’
पॉडकास्ट के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि यह केवल भ्रष्टाचार की जांच का मामला नहीं है, बल्कि विपक्षी नेताओं को तोड़ने की एक सुनियोजित रणनीति है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें स्पष्ट संकेत दिए गए थे कि यदि वे पाला बदलते हैं, तो उन पर चल रहे तमाम मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाएंगे। बघेल ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों केवल विपक्षी नेताओं के खिलाफ ही ED (प्रवर्तन निदेशालय) और IT (आयकर विभाग) सक्रिय रहते हैं, जबकि भाजपा में शामिल होते ही नेताओं के दाग धुल जाते हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और उनके कई पूर्व करीबियों के ठिकानों पर शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में छापेमारी हुई है। बघेल ने इन कार्रवाइयों को सीधे तौर पर उनके ‘इनकार’ से जोड़कर पेश किया है।
“मुझसे भाजपा में शामिल होने के लिए कहा गया था। मेरे मना करने के बाद ही रेड और जांच का दायरा बढ़ाया गया। यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है, जहाँ एजेंसियों को सत्ता हासिल करने का जरिया बना लिया गया है।” — भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़