Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक अर्थ — शिव के हर प्रतीक में जीवन का दर्शन

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शिव के प्रतीकों का रहस्य: भस्म से लेकर गले के नाग तक

महादेव के स्वरूप में सबसे विचित्र है उनके शरीर पर लगी भस्म। यह प्रतीक हमें याद दिलाता है कि जीवन नश्वर है और अंत में सब कुछ मिट्टी में मिल जाना है। वहीं, उनके गले में लिपटा वासुकी नाग यह संदेश देता है कि विषैले और नकारात्मक प्राणियों या विचारों को वश में रखकर ही शांति प्राप्त की जा सकती है। शिव ने नाग को गले लगाया, उसे मारा नहीं, जो सह-अस्तित्व की पराकाष्ठा है।

सिर पर गंगा और माथे पर चंद्रमा का महत्व

शिव की जटाओं से फूटती गंगा ज्ञान के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है। यह बताती है कि ज्ञान कभी ठहरता नहीं। उनके मस्तक पर विराजमान अर्धचंद्र मन के नियंत्रण का सूचक है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है और शिव ने इसे धारण किया है, जिसका अर्थ है मन पर पूर्ण विजय।

“महाशिवरात्रि केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि शिव के गुणों को आत्मसात करने का अवसर है। उनके हाथ का त्रिशूल दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों के विनाश का प्रतीक है। दिल्ली के सभी प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु निर्बाध दर्शन कर सकें।”
— पंडित राम कृष्ण, मुख्य पुजारी, गौरी शंकर मंदिर

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