भारत में दृश्यता और सूतक काल का गणित
ज्योतिष शास्त्र और खगोल वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) मुख्य रूप से अंटार्कटिका, हिंद महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। चूंकि भारत में ग्रहण के समय रात होगी, इसलिए यह यहाँ दिखाई नहीं देगा। शास्त्रों के अनुसार, जो ग्रहण चर्म चक्षुओं से दिखाई नहीं देता, उसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल मान्य नहीं होता है। इसलिए, दिल्ली, मुंबई या रायपुर जैसे शहरों में मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और सामान्य पूजा-पाठ जारी रहेगा।
“यह एक खगोलीय घटना है जो दक्षिण गोलार्ध में अधिक प्रभावी रहेगी। भारत में इसका कोई दृश्य प्रभाव नहीं होगा, इसलिए लोगों को घबराने या रोजमर्रा के कामों को रोकने की आवश्यकता नहीं है।”
— डॉ. वी. राजगोपाल, खगोल शास्त्री