सुकमा | छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और ‘पुना नर्कोम’ (नई सुबह) अभियान से प्रभावित होकर 15 सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के आला अधिकारियों के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में ओडिशा स्टेट कमेटी का खूंखार सदस्य सुदर्शन भी शामिल है, जो लंबे समय से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था।
मुख्यधारा में वापसी: सुदर्शन का समर्पण बड़ी उपलब्धि
पुलिस के अनुसार, सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सबसे महत्वपूर्ण नाम सुदर्शन का है। वह ओडिशा स्टेट कमेटी का सदस्य था और कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। उसके साथ आए अन्य 14 नक्सली भी संगठन के अलग-अलग विंग (जैसे PLGA बटालियन और मिलिशिया) में सक्रिय थे।
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इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान बताया कि वे:
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नक्सली संगठन की खोखली विचारधारा और भेदभाव से तंग आ चुके थे।
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क्षेत्र में लगातार खुल रहे पुलिस कैंपों और बढ़ते दबाव के कारण अलग-थलग पड़ गए थे।
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शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं।
मिलेगी आर्थिक सहायता और सुविधाएं
सुकमा पुलिस अधीक्षक (SP) और सीआरपीएफ के अधिकारियों ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की नीति के तहत तत्काल सहायता राशि प्रदान की गई है।
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प्रोत्साहन राशि: प्रत्येक को तात्कालिक सहायता के तौर पर ₹25,000 से ₹50,000 तक की राशि दी जाएगी।
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पुनर्वास: रहने के लिए आवास, बच्चों की शिक्षा और कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।