Child Labor in Chhattisgarh Schools : शिक्षा का अपमान स्कूल में RTE छात्रों से ढुलवाए जा रहे पत्थर, वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें

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Child Labor in Chhattisgarh Schools

‘तुम मुफ्त में पढ़ते हो, इसलिए काम करो’

पीड़ित छात्रों ने कैमरे पर अपनी आपबीती सुनाई है। कक्षा 6वीं और 7वीं के छात्रों का कहना है कि प्रिंसिपल उन्हें क्लास से बाहर निकालकर पत्थर ढोने, झाड़ू लगाने और अन्य शारीरिक श्रम करने के लिए मजबूर करती हैं। जब बच्चों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें कथित तौर पर यह कहकर चुप करा दिया गया कि वे RTE के तहत मुफ्त शिक्षा पा रहे हैं, इसलिए स्कूल का काम करना उनका कर्तव्य है। यह घटना दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल क्षेत्र कुआकोंडा की है, जहां सरकार गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा करती है।

अभिभावकों में गुस्सा, वीडियो ने खोली पोल

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि छोटे-छोटे बच्चे स्कूल परिसर में भारी कट्टे और पत्थर उठा रहे हैं। अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि वे अपने बच्चों को भविष्य बनाने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि मजदूरी सीखने के लिए। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह सिलसिला काफी समय से चल रहा था, लेकिन बच्चों के डरे होने के कारण मामला सामने नहीं आ पाया।

“मामला बेहद गंभीर है। किसी भी छात्र से शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा शारीरिक श्रम कराना कानूनन अपराध है। हमने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को जांच के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।”
— जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), दंतेवाड़ा

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यह घटना RTE (Right to Education) कानून की धज्जियां उड़ाती है। नियम के मुताबिक, निजी और विशेष स्कूलों में 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। दंतेवाड़ा के इस मामले ने प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, शिक्षा विभाग की टीम स्कूल के अन्य छात्रों और स्टाफ के बयान दर्ज कर रही है। इलाके के लोग आरोपी प्रिंसिपल को तत्काल पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

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