रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहे Mahanadi Water Dispute Tribunal से जुड़े मामले में एक बड़ी अपडेट सामने आई है। मंगलवार को न्यायाधिकरण की टीम Chandrapur के दौरे पर पहुंचेगी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज भी टीम के साथ रहेंगे और महानदी से जुड़े विभिन्न स्थलों का निरीक्षण करेंगे।
बताया जा रहा है कि टीम Gangrel Dam सहित अन्य स्थानों का भी दौरा कर जल बंटवारे से जुड़े तथ्यों का अध्ययन करेगी। यह दौरा दोनों राज्यों के बीच चल रहे जल विवाद को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
1983 से चल रहा है महानदी जल विवाद
छत्तीसगढ़ और Odisha के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर वर्ष 1983 से विवाद चल रहा है। इस विवाद के समाधान के लिए वर्ष 2018 में Mahanadi Water Disputes Tribunal का गठन किया गया था। तब से न्यायाधिकरण दोनों राज्यों के दावों और तथ्यों की जांच कर रहा है।
क्यों अहम है महानदी का पानी
महानदी दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण नदी मानी जाती है। इसका पानी खेती और पेयजल के लिए प्रमुख स्रोत है। इसी वजह से जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है और मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।
छत्तीसगढ़ का पक्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य महानदी के पानी का केवल अपने हिस्से के अनुसार ही वैध उपयोग कर रहा है और यह पानी प्रदेश के किसानों व लोगों की जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
ओडिशा का आरोप
वहीं Odisha सरकार का आरोप है कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी पर बैराज और अन्य संरचनाएं बनाने के कारण Hirakud Dam में पानी की कमी होने लगी है, जिससे वहां के किसानों और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
न्यायाधिकरण की टीम का यह दौरा दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद के समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।