रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन सदन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रही। कार्यवाही की शुरुआत होते ही स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन का मुद्दा सदन में गरमाया। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर आत्मानंद स्कूलों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए प्रश्नकाल में जमकर घेरा।
नर्सरी कक्षाओं पर रोक से हड़कंप
सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य के कई आत्मानंद स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र से प्री-नर्सरी, LKG और UKG की कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी। इस फैसले का विरोध करते हुए विपक्षी सदस्यों ने कहा कि इससे उन मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों को बड़ा झटका लगेगा, जो अपने बच्चों को शुरुआत से ही अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना चाहते थे।
सरकार का पक्ष और नई शिक्षा नीति (NEP)
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रावधानों के अनुरूप उठाया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि:
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पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के लिए प्रदेश में 11,000 बालवाड़ियां खोलने की योजना है।
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आत्मानंद स्कूलों को अब पुराने ढर्रे के बजाय एक सुव्यवस्थित शिक्षा नीति के अंतर्गत लाया जा रहा है।
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कलेक्टरों के अधीन चलने वाली स्कूल प्रबंधन समितियों की भूमिका में भी बदलाव किया जाएगा ताकि राज्यभर में एक समान शिक्षा नीति लागू हो सके।
अभिभावकों और शिक्षकों में चिंता
भले ही सरकार इसे नीतिगत बदलाव बता रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों में अभिभावकों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। वहीं, आत्मानंद स्कूलों में संविदा पर कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर भी सदन में सवाल उठाए गए, जिस पर सरकार ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया है।