Chhattisgarh School Teacher Ratio : विधायक राघवेंद्र सिंह के सवाल पर घिरी सरकार, स्कूलों में शिक्षकों की कमी उजागर

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Chhattisgarh School Teacher Ratio

राघवेंद्र सिंह के सवाल पर सरकार का घेराव

यह मामला कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह द्वारा विधानसभा में उठाए गए एक सवाल के बाद गरमाया। उन्होंने सरकार से पूछा था कि क्या राज्य के हर स्कूल में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत तय मानकों का पालन किया जा रहा है। इसके जवाब में शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि नियम के अनुसार हर 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर प्रदेश के सभी स्कूलों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।

मंत्री ने सदन को बताया कि सुदूर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विधायक राघवेंद्र सिंह ने इस पर आपत्ति जताते हुए पूछा कि क्या सरकार राज्य के हर स्कूल में इस अनुपात को सुनिश्चित करने के लिए कोई समय सीमा तय करेगी।

“नियम के अनुसार अनुपात 30:1 होना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर यह व्यवस्था अभी लागू नहीं है। हम रिक्त पदों को भरने और युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के जरिए इस खाई को पाटने का प्रयास कर रहे हैं।”
— गजेंद्र यादव, शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़

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“जब तक स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा खोखला है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नए शिक्षकों की भर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी तैनाती कब तक होगी।”
— राघवेंद्र सिंह, विधायक

इस स्वीकारोक्ति का सीधा असर उन लाखों अभिभावकों और छात्रों पर पड़ेगा जो सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। रायपुर के उरला और सिलतरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के स्कूलों से लेकर बस्तर के अंदरूनी इलाकों तक, शिक्षकों की कमी के कारण एक ही शिक्षक कई कक्षाओं को एक साथ पढ़ाने को मजबूर है।

  • नई भर्तियों की उम्मीद: इस स्वीकारोक्ति के बाद अब बेरोजगार युवाओं और शिक्षक अभ्यर्थियों की नजरें आगामी भर्ती विज्ञापन पर टिकी हैं।
  • शिक्षा की गुणवत्ता: अनुपात बिगड़ने से बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  • प्रशासनिक बदलाव: शिक्षा विभाग अब शिक्षकों के ‘सेटअप’ और ट्रांसफर पॉलिसी में बड़े बदलाव कर सकता है ताकि शहरी और ग्रामीण स्कूलों के बीच का संतुलन सुधारा जा सके।
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