- बड़ी ताकत: 30,000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ रायपुर की सड़कों पर उतरी कांग्रेस।
- प्रमुख चेहरे: सचिन पायलट और पूर्व सीएम भूपेश बघेल प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।
- मुख्य मुद्दे: मनरेगा का नाम बदलना, सिलेंडर के बढ़ते दाम और बिजली दरों में बढ़ोतरी।
Congress Assembly Gherao , रायपुर — छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज राजनीतिक पारा चरम पर है। कांग्रेस पार्टी ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विधानसभा घेराव शुरू कर दिया है। पीसीसी चीफ दीपक बैज के नेतृत्व में निकले इस ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हैं। यह प्रदर्शन न केवल मनरेगा के नाम बदलने के विरोध में है, बल्कि किसानों से वादाखिलाफी और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की एक बड़ी रणनीतिक चाल है।
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30,000 कार्यकर्ताओं का जमावड़ा, राजधानी में ‘ब्लॉक’ की स्थिति
प्रदर्शन का आकार इतना बड़ा है कि प्रशासन को पूरे शहर के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है। कांग्रेस का दावा है कि 30,000 से ज्यादा कार्यकर्ता सड़कों पर हैं। सचिन पायलट और भूपेश बघेल जैसे दिग्गज नेताओं के शामिल होने से कार्यकर्ताओं में भारी जोश दिख रहा है। प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़ने और विधानसभा के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
“सरकार हर मोर्चे पर फेल है। बिजली दरों से लेकर नशे के कारोबार तक, जनता त्रस्त है। हम सड़क से सदन तक इस आवाज को दबने नहीं देंगे।” — दीपक बैज, पीसीसी चीफ
कांग्रेस इस बार केवल एक मुद्दे पर नहीं खेल रही। पार्टी ने धान खरीदी, गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और बिजली दरों को लेकर एक साथ हमला बोला है। धान खरीदी में वादाखिलाफी को लेकर किसानों में नाराजगी को कांग्रेस ने मुख्य हथियार बनाया है। यह घेराव आगामी चुनावों से पहले विपक्षी एकता और शक्ति प्रदर्शन का एक बड़ा ट्रेलर माना जा रहा है। पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रवेश द्वारों पर जांच बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति बेकाबू न हो।