- बड़ा बदलाव: अब केवल रेगुलर सरकारी शिक्षक ही परीक्षाओं में पर्यवेक्षक (Invigilator) बन सकेंगे।
- सख्त निर्देश: ड्यूटी से इंकार करने पर ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1965’ के तहत अनुशासनहीनता का केस चलेगा।
- निरीक्षण का असर: प्राइवेट शिक्षकों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी मिलने के बाद लिया गया फैसला।
CG Vyapam Exam Rule , रायपुर — छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) ने परीक्षा संचालन को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। व्यापमं ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी परीक्षा केंद्र पर गेस्ट लेक्चरर या प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक पर्यवेक्षक की भूमिका में नहीं दिखेंगे। बोर्ड ने यह कदम तब उठाया जब जांच में पाया गया कि सरकारी शिक्षकों के ड्यूटी से बचने के कारण कई केंद्रों पर निजी शिक्षकों को तैनात किया जा रहा था, जिससे परीक्षाओं की शुचिता प्रभावित हो रही थी।
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ड्यूटी छोड़ना अब नहीं होगा आसान
व्यापमं ने सरकारी शिक्षकों के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अब परीक्षा ड्यूटी के लिए मिले आदेश को ठुकराना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा। यदि कोई शिक्षक बिना ठोस कारण के ड्यूटी जॉइन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत विभागीय जांच और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड का लक्ष्य परीक्षा केंद्रों पर पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण बहाल करना है।
“परीक्षाओं की गोपनीयता और निष्पक्षता से समझौता नहीं किया जा सकता। पर्यवेक्षण का जिम्मा केवल उन्हीं पर होगा जो सेवा नियमों से सीधे बंधे हैं।” — व्यापमं अधिकारी
हालिया निरीक्षणों में यह सामने आया था कि कई केंद्रों पर सरकारी स्टाफ की कमी का बहाना बनाकर निजी शिक्षकों से काम लिया जा रहा था। व्यापमं ने इसे नियमों का उल्लंघन माना है। नए आदेश के बाद, अब केंद्र अध्यक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर एक हॉल में केवल शासकीय कर्मचारी ही तैनात हों। इससे परीक्षा के दौरान होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर लगाम लगेगी। व्यापमं के इस फैसले से आने वाली प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को शिक्षकों की उपलब्धता का डेटा पहले से तैयार रखना होगा।