- बड़ा नतीजा: कोर्ट ने 42 में से केवल 5 आरोपियों को हमले का दोषी माना।
- सजा का ऐलान: दोषियों को 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।
- केस क्लोजर: सुनवाई के दौरान एक आरोपी पुलिस कांस्टेबल की मौत, उसके खिलाफ केस खत्म।
Una Case 2016 Conviction , वेरावल — गुजरात के गिर सोमनाथ जिले की एक अदालत ने सोमवार को ऐतिहासिक ऊना दलित कोड़ेबाजी मामले में अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने इस हिंसा के 5 दोषियों को पांच-पांच साल की जेल की सजा सुनाई है। हालांकि, अभियोजन पक्ष बाकी 37 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिसके चलते उन्हें बरी कर दिया गया। यह मामला साल 2016 में मोटा समढियाला गांव में कथित गोकशी के नाम पर एक दलित परिवार की सरेआम पिटाई से जुड़ा था, जिसने देशव्यापी आक्रोश पैदा किया था।
मैदान में केवल 5 दोषी, 37 को मिली ‘क्लीन चिट’
वेरावल कोर्ट ने सोमवार (16 मार्च, 2026) को लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। अभियोजन पक्ष ने कुल 42 आरोपियों के खिलाफ केस लड़ा था। कोर्ट ने पाया कि हिंसा में 5 लोगों की सीधी संलिप्तता के पुख्ता सबूत मौजूद थे। वहीं, 37 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने रिहा करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल, जो इस मामले में आरोपी था, उसकी मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पहले ही समाप्त कर दी गई थी।
“न्याय में देरी हुई, लेकिन कोर्ट ने दोषियों की पहचान कर ली है। हम फैसले के विवरण का अध्ययन करेंगे और आगे की रणनीति बनाएंगे।” — पीड़ित पक्ष के वकील
11 जुलाई, 2016 को ऊना के मोटा समढियाला गांव में ‘गौ रक्षकों’ के एक समूह ने दलित समुदाय के सदस्यों पर हमला किया था। उन पर मरी हुई गाय की खाल उतारने के दौरान गोकशी का आरोप लगाया गया था। पीड़ितों को सरेआम कोड़ों से पीटा गया और ऊना शहर तक ले जाया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर न्याय प्रणाली की गति पर सवाल खड़े किए हैं। दोषियों को सजा मिलना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन बड़ी संख्या में आरोपियों का बरी होना पीड़ितों के लिए एक झटका माना जा रहा है।