- मुख्य घटना: हिंदू कैलेंडर की पहली अमावस्या आज, 18 मार्च 2026 को मनाई जा रही है।
- स्नान-दान का समय: सुबह 04:30 बजे से लेकर सुबह 06:15 बजे तक का समय सबसे प्रभावी।
- अगला पड़ाव: कल से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष का आगाज।
Chaitra Amavasya 2026 , नई दिल्ली — चैत्र अमावस्या 2026 आज यानी 18 मार्च को पूरे देश में मनाई जा रही है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि पितृ दोष से मुक्ति पाने और आध्यात्मिक शुद्धि का सबसे बड़ा मौका है। आज सूर्योदय के साथ ही पवित्र नदियों में श्रद्धालुओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। अगर आप भी आज दान-पुण्य या पितरों को जल देना चाहते हैं, तो समय का खेल बहुत महत्वपूर्ण है।
मुहूर्त का गणित: कब करें स्नान और तर्पण?
आज अमावस्या तिथि सुबह से ही प्रभावी है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे उत्तम है। यदि आप नदियों तक नहीं जा सकते, तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पितरों को जल (तर्पण) देने का सबसे सटीक समय दोपहर 11:30 बजे से 12:45 बजे के बीच रहेगा। यह वह समय है जब सूर्य अपने चरम पर होता है और पितृ पूजा का फल सबसे अधिक मिलता है।
“चैत्र अमावस्या पर किया गया दान और तर्पण न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि आने वाले पूरे साल के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।” — ज्योतिषाचार्य
आज के दिन कुछ विशेष कार्यों पर ध्यान देना जरूरी है ताकि आपकी पूजा सफल हो:
- तिल और गुड़ का दान: आज काले तिल और गुड़ का दान करना आपके कष्टों को कम कर सकता है।
- पीपल पूजा: पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- इनसे बचें: आज के दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और घर में क्लेश से पूरी तरह परहेज करें।
चैत्र अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह विक्रमी संवत के समापन का प्रतीक है। कल से हिंदू नववर्ष शुरू होगा, इसलिए आज अपनी पुरानी नकारात्मकता को पीछे छोड़ने का दिन है।