ग्लियोब्लास्टोमा पर नई रिसर्च— ब्रेन ट्यूमर के सबसे आक्रामक रूपों में गिने जाने वाले ग्लियोब्लास्टोमा को लेकर नई वैज्ञानिक रिसर्च सामने आई है। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ (PNAS) में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह ट्यूमर शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म का इस्तेमाल कर अपनी ग्रोथ को तेज करता है।
ग्लियोब्लास्टोमा पर नई रिसर्च: शरीर की शुगर से तेजी से बढ़ता खतरनाक ब्रेन ट्यूमर

कैसे काम करता है यह ‘अंदर का दुश्मन’
रिसर्च बताती है कि ग्लियोब्लास्टोमा सेल्स शरीर में मौजूद ग्लूकोज को तेजी से खींचते हैं। यह प्रक्रिया उन्हें सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ने की क्षमता देती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह ट्यूमर दिमाग और रीढ़ की हड्डी में बनता है और बहुत कम समय में फैल सकता है।
विशेषज्ञों ने इसे ऐसे समझाया है—जैसे कोई व्यक्ति आपके ही घर के राशन से ताकत लेकर आपके खिलाफ खड़ा हो जाए। ट्यूमर शरीर की ऊर्जा प्रणाली का फायदा उठाता है और उसे अपने विकास में बदल देता है।
वैज्ञानिकों के लिए भी चौंकाने वाला खुलासा
इस अध्ययन में पाया गया कि ग्लियोब्लास्टोमा केवल शुगर का इस्तेमाल नहीं करता, बल्कि वह शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम को बदलने की क्षमता भी रखता है। यानी शरीर खुद ही उस प्रक्रिया को सपोर्ट करने लगता है, जिससे ट्यूमर और तेजी से बढ़ सके।
Voices from the Ground / Official Statements
“यह खोज हमें ट्यूमर के व्यवहार को नए तरीके से समझने में मदद करती है। अगर हम इसके मेटाबॉलिज्म को रोक सकें, तो इलाज की दिशा बदल सकती है।”
— एक वरिष्ठ शोधकर्ता, PNAS स्टडी टीम
आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब
डॉक्टर्स का कहना है कि यह रिसर्च भविष्य के इलाज के लिए अहम है। अब फोकस केवल ट्यूमर हटाने पर नहीं, बल्कि उसके ‘फ्यूल सप्लाई’ को रोकने पर भी होगा।
फिलहाल ग्लियोब्लास्टोमा का इलाज सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी से किया जाता है। लेकिन इसकी तेजी से बढ़ने की क्षमता के कारण मरीजों के लिए चुनौती बनी रहती है। नई रिसर्च इस दिशा में नई उम्मीद दे रही है।