- बड़ी कामयाबी: भारतीय झंडे वाले टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ ने सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर लिया है।
- भारी खेप: जहाज पर 46,000 मीट्रिक टन LPG लोड है, जो 6 अप्रैल तक मुंबई पोर्ट पहुंचेगी।
- सातवां स्ट्राइकर: यह मार्च-अप्रैल के बीच होर्मुज को पार करने वाला 7वां भारतीय जहाज बना है।
Green Saanvi LPG Tanker , मुंबई — भारत ने एनर्जी सिक्योरिटी के मैदान पर एक अहम ‘गोल’ दागा है। खाड़ी में जारी भीषण तनाव के बीच भारतीय LPG टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खतरनाक चक्रव्यूह को भेद दिया है। लगभग 46,000 मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर यह जहाज अब भारतीय तट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 6 अप्रैल को मुंबई पहुंचने वाला यह कंसाइनमेंट देश में कुकिंग गैस की किल्लत झेल रहे लाखों परिवारों के लिए किसी ‘मैच विनिंग’ पारी से कम नहीं है।
‘ग्रीन सान्वी’ का डिफेंसिव खेल: कैसे पार किया डेंजर जोन?
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे में भारतीय जहाजों का वहां से निकलना किसी एड्रेनालाईन-पंपिंग थ्रिलर जैसा है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का दबाव: इस संकरे रास्ते पर ईरान का कड़ा पहरा है। भारतीय बेड़े ने कूटनीतिक ‘फील्डिंग’ का इस्तेमाल करते हुए रास्ता बनाया।
- 6 अप्रैल की डेडलाइन: जहाज की रफ्तार और मौजूदा समुद्री स्थिति को देखते हुए यह सोमवार तक मुंबई में लंगर डाल देगा।
- फंसे हुए खिलाड़ी: हालांकि ‘ग्रीन सान्वी’ बाउंड्री लाइन पार कर चुका है, लेकिन कई भारतीय तेल-गैस जहाज अब भी ‘होल्ड’ पर हैं और ईरानी क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं।
भारत ने इस बार अपनी सप्लाई चेन को टूटने से बचाने के लिए ‘प्रिसिजन स्ट्राइक’ की तरह काम किया है। 46,000 टन की यह खेप घरेलू सिलेंडर की वेटिंग लिस्ट को काफी हद तक कम कर देगी।
“ग्रीन सान्वी का होर्मुज पार करना हमारी एनर्जी सप्लाई लाइन के लिए ऑक्सीजन जैसा है। हम अन्य जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं।”
— पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी