Varuthini Ekadashi 2026 Date : वरूथिनी एकादशी 2026 , क्या आप भी कर रहे हैं ये गलतियां? तुलसी पूजा और स्नान से जुड़े कड़े नियमों का रखें ध्यान

Varuthini Ekadashi 2026 Date Varuthini Ekadashi 2026 Date
Varuthini Ekadashi 2026 Date
  • ड़ा अवसर: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी मोक्ष और पापों से मुक्ति का सबसे बड़ा ‘स्कोरबोर्ड’ है।
  • रेड कार्ड: तुलसी को जल देना और बाल धोना इस दिन वर्जित; नियमों का उल्लंघन बिगाड़ सकता है ‘किस्मत का खेल’।
  • मुख्य लक्ष्य: भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की संयुक्त पूजा से सुख-समृद्धि की ‘जीत’ सुनिश्चित करें।

Varuthini Ekadashi 2026 Date , नई दिल्ली — वैशाख मास की वरूथिनी एकादशी का ‘मैच’ शुरू हो चुका है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि सौभाग्य और पाप मुक्ति का एक ‘गोल्डन चांस’ है। लेकिन सावधान! इस खास दिन पर आपकी एक छोटी सी ‘अनफोर्स्ड एरर’ यानी अनजाने में की गई गलती मां लक्ष्मी को नाराज कर सकती है। शास्त्रों में इस दिन के लिए कुछ सख्त ‘फील्डिंग’ लगाई गई है, जिनका पालन करना हर भक्त के लिए जरूरी है।

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मैदान के नियम: क्यों वर्जित है तुलसी को जल देना?

एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को जल देना सबसे बड़ी ‘फाउल’ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। अगर आप उन्हें जल देते हैं, तो उनका व्रत टूट जाता है। इसी तरह, बाल धोना या नाखून काटना भी आध्यात्मिक अनुशासन के खिलाफ है और इसे नकारात्मकता को निमंत्रण देने जैसा माना जाता है।

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  • प्रतिबंध 1: तुलसी के पत्तों को तोड़ना या पौधे में जल चढ़ाना सख्त मना है।
  • प्रतिबंध 2: सिर धोना, साबुन का प्रयोग और बाल काटना ‘पेनल्टी’ आमंत्रित कर सकता है।
  • शुभ कार्य: विष्णु सहस्रनाम का पाठ और दीप दान इस दिन के ‘गेम चेंजर’ हैं।

“वरूथिनी एकादशी सौभाग्य की चाबी है। नियमों का पालन अनुशासन की परीक्षा है। जो भक्त इन सीमाओं में रहकर पूजा करता है, उसकी सुख-समृद्धि की ट्रॉफी पक्की है।” — आचार्य राजेश पाठक

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