वर्दी का रौब या मानसिक तनाव?
घटना उस समय हुई जब प्रार्थी अपनी पुरानी शिकायत पर हुई प्रगति जानने रतनपुर थाने पहुँचा था। चश्मदीदों के मुताबिक, एएसआई किसी बात को लेकर पहले से ही उखड़े हुए थे। जैसे ही प्रार्थी ने अपनी फाइल के बारे में पूछा, अधिकारी ने उन पर हाथ साफ करना शुरू कर दिया।
“पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, उन पर हाथ उठाना नहीं। वर्दी की आड़ में इस तरह की गुंडागर्दी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एएसआई को सस्पेंड कर दिया गया है और विभागीय जांच के साथ कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।”
— एसएसपी, बिलासपुर पुलिस
थाने के भीतर हुई इस मारपीट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में इस व्यवहार को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
लॉकर रूम टॉक: पुलिस महकमे में हलचल
इस घटना के बाद बिलासपुर पुलिस के भीतर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। अनुशासनहीनता के इस मामले ने विभाग की छवि को नुकसान पहुँचाया है।
- 20 थप्पड़: प्रार्थी के अनुसार एएसआई ने उसे लगातार पीटा।
- एफआईआर दर्ज: पहली बार किसी एएसआई पर मारपीट के लिए अपने ही थाने में मामला दर्ज हुआ है।
- निलंबन: एसएसपी ने बिना देरी किए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
हंगामे के दौरान थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन तब तक प्रार्थी को काफी चोटें आ चुकी थीं। पुलिस महकमे के भीतर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है। निलंबन के बाद अब विभागीय जांच (Departmental Inquiry) की जाएगी। प्रार्थी का मेडिकल कराया गया है और दर्ज एफआईआर के आधार पर एएसआई की गिरफ्तारी भी संभव है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे कुछ अधिकारियों का व्यवहार पूरी पुलिस फोर्स की साख दांव पर लगा देता है। आने वाले दिनों में रतनपुर थाने के स्टाफिंग और मॉनिटरिंग में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।