रायपुर: राजधानी रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई ने बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और ‘3 स्टंप्स’ ऐप के मास्टरमाइंड गुलशन उर्फ बाबू खेमानी की गिरफ्तारी के बाद अब सट्टेबाजी के नेटवर्क से जुड़ी कई परतें खुल रही हैं। पुलिस जांच में बाबू के मोबाइल से उसके ‘परमानेंट सटोरियों’ की एक चौंकाने वाली लिस्ट हाथ लगी है, जिसमें शहर के कई रसूखदार कारोबारियों के नाम शामिल हैं।
रवि भवन के कारोबारियों पर पुलिस की नज़र
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बाबू खेमानी के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में रवि भवन (Ravi Bhawan) के कई प्रतिष्ठित व्यापारियों के नाम सामने आए हैं। ये वे लोग हैं, जो मोबाइल और कवर कारोबार से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से इस सट्टा सिंडिकेट का हिस्सा रहे हैं।
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आईडी ओनर का खुलासा: बाबू खेमानी खुद ‘आईडी ओनर’ की भूमिका निभा रहा था। वह अलग-अलग नामों से ऑनलाइन सट्टा खेलने के लिए आईडी बनवाता और उसे मोटी रकम के बदले इन कारोबारियों को उपलब्ध कराता था।
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टेलीग्राम का जाल: सट्टेबाजी के इस खेल में बाबू टेलीग्राम लिंक के जरिए लोगों को जोड़ता था। प्रेडिक्शन और टिप्स के नाम पर लोगों को सट्टा नेटवर्क में एंट्री दी जाती थी, जो बाद में आर्थिक दलदल का कारण बन जाती थी।
वसूली का खौफनाक ‘मैकेनिज्म’
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बाबू खेमानी ने सट्टे की बड़ी राशि वसूलने के लिए एक अलग ‘वसूली गैंग’ पाल रखा था। पुलिस को मिली शिकायतों के मुताबिक:
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धमकी और दबाव: सट्टे के पैसे नहीं चुकाने वाले लोगों को न केवल धमकाया जाता था, बल्कि उन्हें सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी भी दी जाती थी।
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जेवर तक गिरवी: कुछ मामलों में सट्टे की रकम के बदले लोगों से सोने के जेवर तक वसूले जाने की जानकारी सामने आई है।
विदेशों से जुड़ा तार, सरगना फरार
पुलिस ने अब तक बाबू खेमानी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी पता चला है कि बाबू 2011 से ही लगातार दुबई और थाईलैंड का दौरा कर रहा था। इस पूरे ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बाबू का भाई, करण खेमानी अब भी फरार है, जिसके विदेश भागने की आशंका जताई जा रही है।