रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर और धमतरी जिलों में चल रहे संदिग्ध विदेशी फंडिंग और कथित मतांतरण के खेल का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए देश भर की 153 ऐसी संस्थाओं (NGOs) को रडार पर लिया है, जिन्हें विदेशों से संदिग्ध तरीके से फंड मिल रहा था। इस कार्रवाई के बाद से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
ED की जांच में ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) नामक संगठन की संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार, इस संगठन ने अमेरिकी बैंक ‘ट्रूइस्ट बैंक’ (Truist Bank) से जुड़े विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग कर भारत में बड़ी मात्रा में नकदी निकाली है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जैसे वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में इन कार्डों के जरिए लगभग 6.5 करोड़ रुपये की असामान्य और संदिग्ध निकासी की गई है।
कैसे हो रहा था खेल?
ED ने अपनी जांच में पाया कि विदेशी फंडिंग को विनियमित करने वाले नियमों (FCRA) को दरकिनार कर, इन डेबिट कार्डों के जरिए सीधे एटीएम से पैसा निकाला गया, ताकि सरकारी एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।
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जांच का दायरा: ED ने देशभर में 18 और 19 अप्रैल को छापेमारी कर इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। बेंगलुरु एयरपोर्ट पर ‘मीका मार्क’ नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया, जिसके पास से भारी मात्रा में विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए।
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बड़ी साजिश का शक: सूत्रों के अनुसार, विदेशी धन का उपयोग कथित तौर पर धार्मिक मतांतरण और क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने जैसी गतिविधियों के लिए किए जाने का संदेह है।
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153 संस्थाएं निशाने पर: अब ईडी इन 153 संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन की गहराई से छानबीन कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन विदेशी पैसों का असली उपयोग कहां और किन गतिविधियों में किया गया है।
सरकार का सख्त रुख
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि मतांतरण और विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर इस नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।