रायपुर : खरीफ सीजन 2026 के आगमन से पहले छत्तीसगढ़ के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां एक ओर मानसून की आहट के साथ खेतों की तैयारी का समय शुरू हो गया है, वहीं दूसरी ओर बीज वितरण व्यवस्था में आ रही बाधाओं ने किसानों को परेशान कर रखा है। जानकारी के अनुसार, बीज निगम ने धान सहित विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीजों की नई दरें जारी कर दी हैं, जिसमें धान की सभी किस्मों पर प्रति क्विंटल 150 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
क्या है स्थिति और क्यों बढ़ रही है चिंता?
खरीफ सीजन शुरू होने में अब महज 24 दिन शेष हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। किसानों को अभी भी सहकारी समितियों से बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
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कीमतों में इजाफा: बीज निगम द्वारा जारी नई दरों के तहत धान (मोटा, पतला और सुगंधित) की सभी श्रेणियों में 150 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है।
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बीज की उपलब्धता का संकट: एक ओर जहां कीमतें बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी ओर समितियों में बीजों का सुचारु वितरण शुरू न हो पाने के कारण किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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समितियों के चक्कर: रेट तय न होने के कारण पहले जो देरी हो रही थी, अब दरें जारी होने के बाद भी व्यवस्था दुरुस्त न होने से किसान परेशान हैं। उन्हें रोजाना बीज के लिए समितियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है।
प्रमुख फसल और बीज दरें
बीज निगम ने प्रमाणित बीजों की दरों में बदलाव किया है। आधार बीजों की दरें प्रमाणित बीजों से 100 रुपये प्रति क्विंटल अधिक निर्धारित की गई हैं। हालांकि, इन दरों के लागू होने के बाद भी किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर बीज नहीं मिलने से खेती की बुवाई पिछड़ने का डर सता रहा है।
प्रशासन के लिए चुनौती
खेती का सीजन सिर पर है और ऐसे में बीज वितरण में देरी सीधे तौर पर उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। किसानों की मांग है कि सहकारी समितियों में वितरण व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुचारु किया जाए ताकि वे समय पर अपनी फसलों की बुवाई शुरू कर सकें।