Shiva-Parvati Puja Tips : नई दिल्ली | हिंदू धर्म में सोमवार का दिन देवों के देव महादेव और शक्ति स्वरूपा माता पार्वती को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवार के दिन कुछ विशेष उपायों और विधि-विधान से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं के लिए यह दिन ‘मनचाहा वर’ पाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है।
मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए विशेष उपाय
यदि विवाह में देरी हो रही है या योग्य रिश्ता नहीं मिल रहा है, तो सोमवार के दिन इस छोटे से उपाय को जरूर आजमाएं:
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महागौरी और शिव का गठबंधन: पूजा के दौरान एक मौली (कलावा) लें। उसे माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के चारों ओर सात बार घुमाते हुए ‘गठबंधन’ करें। ऐसा माना जाता है कि इससे विवाह के योग शीघ्र बनते हैं।
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केसर मिश्रित दूध: शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध अर्पित करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है, जो सुखद वैवाहिक जीवन का कारक है।
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श्रृंगार सामग्री का दान: पूजा के बाद माता पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और बाद में इसे किसी सुहागिन महिला को दान कर दें।
सोमवार की पूजन विधि: स्टेप-बाय-स्टेप
शास्त्रों के अनुसार, पूजा का पूरा फल तभी मिलता है जब उसे सही नियम से किया जाए:
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ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सोमवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और सफेद या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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जलाभिषेक: सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल और शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र, धतूरा और अक्षत चढ़ाएं।
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शक्ति की पूजा: माता पार्वती को सिंदूर और हल्दी अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर सिंदूर या हल्दी नहीं चढ़ाई जाती, यह केवल माता पार्वती को ही अर्पित करें।
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मंत्र जाप: रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
| क्या करें | क्या न करें |
| शिवलिंग पर बेलपत्र उल्टा करके चढ़ाएं। | पूजा में तुलसी के पत्ते का प्रयोग वर्जित है। |
| पूजा के समय सफेद चंदन का तिलक लगाएं। | भगवान शिव को केतकी का फूल न चढ़ाएं। |
| शिव चालीसा या गौरी स्तुति का पाठ करें। | पूजा के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचें। |
शीघ्र विवाह के लिए ‘विशेष मंत्र’
पूजा के अंत में कुंवारी कन्याओं को इस मंत्र का जाप करना चाहिए:
“हे गौरी शंकर अर्धांगिनी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।”