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आधी आबादी को संपत्ति का अधिकार देने की कोशिश
राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अब परिवारों में जमीन और संपत्ति महिलाओं के नाम पर लेने का चलन बढ़ सकता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे महिलाओं की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी। रजिस्ट्री दफ्तरों के बाहर गुरुवार सुबह लोगों की भीड़ सामान्य दिनों से ज्यादा दिखी। कुछ लोग नए नियम की जानकारी लेने पहुंचे, तो कई परिवारों ने जमीन खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी। गर्म दोपहर के बावजूद दफ्तरों के बाहर चर्चा सिर्फ एक थी— “अब जमीन बेटी और पत्नी के नाम पर लेना आसान होगा।”सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह छूट निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत लागू होगी। इससे शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में महिलाओं की संपत्ति हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
रियल एस्टेट बाजार में दिख सकता है असर
प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि फैसले से जमीन खरीद-बिक्री में तेजी आ सकती है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी। पहले जहां रजिस्ट्री शुल्क बड़ा खर्च माना जाता था, अब उसमें सीधी राहत दिखाई देगी। एक स्थानीय प्रॉपर्टी सलाहकार ने बताया कि महिलाओं के नाम पर निवेश बढ़ने से परिवारों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है। कई राज्यों में ऐसे फैसलों के बाद रजिस्ट्री संख्या में बढ़ोतरी देखी गई थी।