Hero Honda Street: क्लच-लेस गियर वाली वो अनोखी बाइक, जिसने 90 के दशक में बदल दिया था सवारी का अंदाज

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Hero Honda Street— भारतीय दोपहिया बाजार के इतिहास में कुछ प्रयोग ऐसे रहे जिन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। साल 1997 में लॉन्च हुई Hero Honda Street इसी कड़ी का एक अहम हिस्सा थी। यह भारत की पहली ‘स्टेप-थ्रू’ बाइक थी, जिसने मोटरसाइकिल की पावर और स्कूटर की सहूलियत का एक अनोखा संगम पेश किया था। उस दौर में जब क्लच दबाकर गियर बदलना ही मोटरसाइकिल की पहचान थी, तब क्लच-लेस तकनीक ने सबको हैरान कर दिया था।

Hero Honda Street: क्लच-लेस गियर वाली वो अनोखी बाइक, जिसने 90 के दशक में बदल दिया था सवारी का अंदाज

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डिजाइन और उपयोगिता: महिला और पुरुष दोनों की पसंद

हीरो होंडा स्ट्रीट का डिजाइन पारंपरिक मोटरसाइकिलों से बिल्कुल अलग था। इसमें लो-स्टेप-थ्रू फ्रेम का इस्तेमाल किया गया था, जिससे इस पर चढ़ना और उतरना बेहद आसान था। यही कारण था कि यह बाइक पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हुई। इसके सामने के हिस्से में एक बास्केट दी गई थी, जो इसे छोटे-मोटे सामान ढोने के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाती थी। इसके बड़े पहिए खराब सड़कों पर भी बेहतर संतुलन प्रदान करते थे, जो उस समय के छोटे पहियों वाले स्कूटरों में एक बड़ी कमी थी।

बिना क्लच के गियर बदलने का जादुई अनुभव

स्ट्रीट की सबसे बड़ी खासियत इसका रोटरी गियरबॉक्स और क्लच-लेस ड्राइविंग अनुभव था। इसमें गियर तो थे, लेकिन क्लच लीवर गायब था। राइडर को बस पैर से गियर बदलना होता था और गाड़ी आगे बढ़ जाती थी। ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने की झंझट से मुक्ति मिलने के कारण शहरी इलाकों में इसे खूब पसंद किया गया।

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विशेषज्ञों की राय और बाजार का असर

“हीरो होंडा स्ट्रीट अपने समय से काफी आगे की मशीन थी। इसने उन ग्राहकों को आकर्षित किया जो मोटरसाइकिल का माइलेज और स्कूटर की उपयोगिता एक साथ चाहते थे। हालांकि, भारतीय बाजार उस समय पूरी तरह से पारंपरिक कम्यूटर बाइक्स की तरफ झुक रहा था।”
— आर.के. शर्मा, ऑटोमोबाइल एनालिस्ट

आज की यादें और विरासत

भले ही आज हीरो होंडा स्ट्रीट सड़कों पर कम दिखाई देती हो, लेकिन इसने होंडा की ‘सुपर कब’ (Super Cub) विरासत को भारत में जीवित रखा। आज के दौर में जो टीवीएस एक्सएल 100 या अन्य मोपेड्स हम देखते हैं, उनकी नींव कहीं न कहीं इसी क्रांतिकारी प्रयोग ने रखी थी। यह बाइक उन लोगों के लिए आज भी एक इमोशन है जिन्होंने 90 के दशक के उत्तरार्ध में अपनी पहली सवारी शुरू की थी।

 

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