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बस्तर में पहली बार इतनी बड़ी सुरक्षा और राजनीतिक बैठक
जगदलपुर की सड़कों पर सुबह से ही सुरक्षा बलों की हलचल तेज दिखी। एयरपोर्ट से लेकर बैठक स्थल तक कड़ी निगरानी रही। शहर में जगह-जगह पुलिस और केंद्रीय बल तैनात किए गए थे। लंबे समय तक नक्सल हिंसा की पहचान रहे बस्तर में इस स्तर की बैठक होना अपने आप में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
बैठक में सुरक्षा, सीमा विवाद, सड़क कनेक्टिविटी, आदिवासी क्षेत्रों में विकास और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक नक्सल प्रभावित इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने पर भी फोकस रखा गया। बैठक के दौरान बाहर मौजूद स्थानीय लोगों में उत्सुकता साफ दिखी। कई लोग सिर्फ नेताओं के काफिले देखने के लिए घंटों सड़क किनारे खड़े रहे। तेज धूप के बावजूद माहौल में अलग ऊर्जा थी। बस्तर की राजनीति में ऐसा दृश्य कम ही देखने को मिलता है।
योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने बैठक को और ज्यादा चर्चित बना दिया। उनके साथ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंचे। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अहम रही। विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार अब बस्तर को सिर्फ सुरक्षा चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि विकास मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है। यही वजह है कि इस तरह की राष्ट्रीय स्तर की बैठकें अब सीधे आदिवासी अंचल में आयोजित की जा रही हैं।