परम एकादशी तिथि और पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 11 जून 2026 को तड़के 12:57 बजे से हो रहा है, जो इसी दिन रात 10:36 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, व्रत 11 जून को ही रखा जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस दिन भगवान शालिग्राम और लक्ष्मी-नारायण की पूजा के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 10:36 बजे से दोपहर 02:05 बजे तक रहेगा। इस समय अवधि में की गई पूजा और अभिषेक का अनंत गुना फल मिलता है। इसके बाद अगले दिन यानी 12 जून को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे के बीच व्रत का पारण किया जाना शास्त्रसम्मत होगा।
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भगवान शालिग्राम के अभिषेक का विधान और नियम
परम एकादशी के दिन भगवान शालिग्राम का पंचामृत से अभिषेक करने की सदियों पुरानी परंपरा है। सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर तांबे या पीतल के पात्र में भगवान शालिग्राम को स्थापित किया जाता है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर बने पंचामृत से उनका अभिषेक होता है। पूजा में तुलसी दल का उपयोग अनिवार्य माना गया है, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी पत्र नहीं तोड़ना चाहिए, इसलिए श्रद्धालु एक दिन पहले ही इसके पत्ते तोड़कर रख लेते हैं।
श्रद्धालुओं पर प्रभाव और मंदिरों में तैयारियां
इस दुर्लभ व्रत को लेकर वाराणसी के प्रमुख विष्णु मंदिरों, विशेषकर बिंदुमाधव मंदिर और गोदौलिया क्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। 11 जून को सुबह से ही गंगा घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का निर्णय लिया है। जो श्रद्धालु घर पर पूजा कर रहे हैं, वे इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर मानसिक जाप कर सकते हैं।
