अहमदाबाद विमान दुर्घटना को बीता एक साल, पायलट एसोसिएशन का फूटा गुस्सा; बोइंग के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग पर अड़े

One year since the Ahmedabad plane crash; Pilot Association's anger erupts. One year since the Ahmedabad plane crash; Pilot Association's anger erupts.
One year since the Ahmedabad plane crash; Pilot Association's anger erupts.

विमान दुर्घटना को बीता एक साल, पायलट एसोसिएशन का फूटा गुस्सा — देश के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक, अहमदाबाद हवाई दुर्घटना को आज ठीक एक साल पूरा हो गया है। 12 जून 2025 को हुए इस भयानक हादसे की पहली बरसी पर भारत के पायलट संगठन ने जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराने की मांग की है। इसके साथ ही, विमान के कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) को जांच के लिए निर्माता देश अमेरिका भेजने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। विशेषज्ञों ने दो टूक कहा है कि इस मामले में विमान निर्माता कंपनी बोइंग की जवाबदेही हर हाल में तय होनी चाहिए।

One year since the Ahmedabad plane crash; Pilot Association's anger erupts.
One year since the Ahmedabad plane crash; Pilot Association’s anger erupts.

32 सेकंड का वो खौफनाक मंजर और 260 मौतें

ठीक एक साल पहले, 12 जून 2025 को दोपहर 1:38 बजे एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 (बोइंग-787 ड्रीमलाइनर) ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरी थी। टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद ही विमान नियंत्रण से बाहर हो गया और एयरपोर्ट से करीब 1.7 किलोमीटर दूर स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के बॉयज हॉस्टल परिसर की इमारतों से टकराकर क्रैश हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान के ईंधन टैंकों में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते हॉस्टल के डाइनिंग हॉल और कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोग (229 यात्री और 12 क्रू मेंबर) और जमीन पर मौजूद 19 मेडिकल छात्रों व स्टाफ सहित कुल 260 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई थी। इस दिल दहला देने वाले हादसे में केवल एक यात्री सुरक्षित बच सका था।

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अमरीका में ब्लैक बॉक्स की जांच पर पायलट संगठन को आपत्ति

विमानन दुर्घटनाओं की जांच के लिए स्थापित देश की सर्वोच्च संस्था एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने हादसे के एक महीने बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में सामने आया था कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पोजीशन पर आ गए थे, जिससे इंजनों को ईंधन की सप्लाई बंद हो गई। हालांकि, यह तकनीकी खराबी थी, विमान का कोई डिजाइन डिफेक्ट था या मानवीय चूक, इस पर अभी भी रहस्य बना हुआ है।

भारत के मुख्य पायलट संगठन ने अब इसी बिंदु को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों को घेरा है। संगठन का कहना है कि विमान निर्माता कंपनी बोइंग पर पहले से ही कई विमानों के डिजाइन और सुरक्षा मानकों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में हादसे के सबसे अहम सबूत यानी सीवीआर और ब्लैक बॉक्स को जांच के लिए अमेरिका भेजना पूरी तरह गलत है, क्योंकि इससे जांच प्रभावित होने या तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है। संगठन ने मांग की है कि किसी भी विदेशी दबाव से मुक्त होकर देश की अदालत की निगरानी में इसकी न्यायिक जांच हो।

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एक साल बाद भी सुलग रहे हैं सवाल, पीड़ितों में आक्रोश

हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी एअर इंडिया और विमानन मंत्रालय की अंतिम विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई है। बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में जहां यह विमान गिरा था, वहां आज भी उस काली दोपहर के निशान मौजूद हैं। स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरकार और एयरलाइन सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की बेटी राधिका रूपाणी समेत कई पीड़ित परिवारों ने टाटा समूह के नेतृत्व वाली एअर इंडिया के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है। परिजनों की मांग है कि हादसे की जगह पर मारे गए निर्दोष लोगों की याद में एक स्मारक (Memorial) बनाया जाए और बोइंग जैसी वैश्विक कंपनियों की लापरवाही को बेनकाब किया जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।

 

 

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