Iran-US Conflict : होर्मुज स्ट्रेट विवाद के बीच अमेरिका ने ईरान पर बरसाए बम, 80 सैन्य ठिकाने निशाने पर

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Iran-US Conflict : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए उसके कई रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सैन्य बल यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि ईरान के सैन्य ढांचे को निशाना बनाते हुए व्यापक ऑपरेशन चलाया गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस कार्रवाई में ईरान के 80 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं।

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अमेरिका का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में ईरान द्वारा कथित तौर पर कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के जवाब में की गई है। वॉशिंगटन ने आरोप लगाया है कि ईरान ने हाल ही में हुए युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन किया और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा किया।

होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव

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अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को खतरा पैदा हो गया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है।

अमेरिका ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों और वैश्विक व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए।

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किन सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना?

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान ईरान की कई महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। इनमें शामिल हैं—

एयर डिफेंस सिस्टम
तटीय निगरानी प्रणाली
सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (Surface-to-Air Missiles)
एंटी-शिप क्रूज मिसाइल लॉन्चर
ड्रोन लॉन्च पैड
सैन्य कमांड और कंट्रोल सेंटर

बताया गया कि दक्षिणी ईरान के सिरीक, केशम और बंदर अब्बास जैसे रणनीतिक बंदरगाह क्षेत्रों में कई तेज धमाके सुनाई दिए। हालांकि इन हमलों में हुए नुकसान या हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

अमेरिका का क्या कहना है?

यूएस सेंट्रल कमांड ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह “रक्षात्मक और जवाबी” है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान की हालिया गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन चुकी थीं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक था।

अमेरिका ने यह भी कहा कि उसका उद्देश्य व्यापक युद्ध शुरू करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन किया है और इसके गंभीर परिणाम होंगे।

ईरान ने कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक हर कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। तेहरान ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताते हुए इसकी निंदा की है।

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मिडिल ईस्ट में बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट में चिंता बढ़ा दी है। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहती है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का लंबा तनाव दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, दोनों देशों की ओर से जारी बयानों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की संभावना भी जताई जा रही है।

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