Parliament Monsoon Session 2026 : नई दिल्ली। 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार देर रात अपने आधिकारिक निवास ‘सेवा तीर्थ’ में एक उच्च स्तरीय बैठक की। करीब तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और पार्टी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष शामिल हुए। बैठक में संसद सत्र की रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मानसून सत्र की रणनीति पर रहा विशेष फोकस
सूत्रों के अनुसार बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति को अंतिम रूप देना था। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों, नीतिगत फैसलों और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में सरकार चाहती है कि संसद में उसकी तैयारी पूरी तरह मजबूत रहे और विपक्ष के सवालों का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सके।
बैठक में सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने, विधायी कार्यों को समय पर पूरा करने और विभिन्न मंत्रालयों के समन्वय पर भी विचार-विमर्श किया गया।
राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
बैठक में केवल संसद सत्र ही नहीं, बल्कि भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों और आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर भी चर्चा हुई। पार्टी संगठन को मजबूत करने, राज्यों में चल रहे अभियानों की समीक्षा और आने वाले चुनावों की तैयारियों को लेकर भी वरिष्ठ नेताओं के बीच विचार साझा किए गए।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया।
संसद सत्र में कई अहम मुद्दों पर होगी बहस
20 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन में पेश कर सकती है। वहीं विपक्ष भी महंगाई, रोजगार, कृषि, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और अन्य समसामयिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
ऐसे में सरकार और भाजपा नेतृत्व पहले से ही अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हुए हैं, ताकि संसद के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर प्रभावी तरीके से अपनी बात रखी जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देर रात बुलाई गई इस उच्च स्तरीय बैठक को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। लगातार तीन घंटे तक चली इस बैठक से यह संकेत मिलता है कि सरकार मानसून सत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी राजनीतिक या संसदीय चुनौती का सामना करने के लिए पहले से तैयारी कर रही है।