High Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत सरकारी कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी शासकीय कर्मचारी के जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज, नियुक्ति के समय प्रस्तुत हलफनामा और सर्विस रिकॉर्ड उसकी व्यक्तिगत जानकारी के दायरे में आते हैं। इसलिए इन्हें बिना वैधानिक आधार के सूचना के अधिकार के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
यह फैसला सरकारी कर्मचारियों की निजता और सूचना के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने निजता के अधिकार को बताया महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी कर्मचारी की निजी जानकारी को बिना उचित कारण सार्वजनिक कर दिया जाए।
अदालत ने कहा कि सरकारी कर्मचारी भी संविधान द्वारा प्रदत्त निजता के अधिकार (Right to Privacy) के हकदार हैं। ऐसे में उनकी व्यक्तिगत जानकारी तभी साझा की जा सकती है, जब कानून में उसका स्पष्ट प्रावधान हो या उससे जुड़ा कोई व्यापक जनहित (Larger Public Interest) सिद्ध किया जाए।
कौन-कौन से दस्तावेज नहीं होंगे सार्वजनिक?
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि निम्न दस्तावेज सामान्य परिस्थितियों में व्यक्तिगत जानकारी माने जाएंगे—
- जाति प्रमाण पत्र
- निवास प्रमाण पत्र
- शैक्षणिक योग्यता संबंधी दस्तावेज
- नियुक्ति के समय दिया गया शपथ पत्र या हलफनामा
- सेवा पुस्तिका (Service Record) और अन्य व्यक्तिगत सेवा अभिलेख
अदालत ने कहा कि इन दस्तावेजों का खुलासा केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति ने आरटीआई आवेदन लगाया है।
RTI और व्यक्तिगत जानकारी के बीच संतुलन जरूरी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा प्रदान करती है। यदि मांगी गई सूचना का किसी सार्वजनिक गतिविधि या व्यापक जनहित से सीधा संबंध नहीं है और उससे किसी व्यक्ति की निजता प्रभावित होती है, तो ऐसी जानकारी देने से इनकार किया जा सकता है।
हालांकि, यदि किसी मामले में भ्रष्टाचार, फर्जी दस्तावेज, नियमों के उल्लंघन या बड़े सार्वजनिक हित का स्पष्ट आधार मौजूद हो, तो संबंधित प्राधिकारी कानून के अनुसार प्रत्येक मामले का अलग-अलग परीक्षण कर निर्णय ले सकता है।
सरकारी विभागों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य के सभी सरकारी विभागों और जन सूचना अधिकारियों (PIO) के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित होगा। भविष्य में आरटीआई के तहत व्यक्तिगत दस्तावेजों से जुड़े आवेदनों का निपटारा करते समय इस फैसले को ध्यान में रखा जा सकता है।
इससे अनावश्यक रूप से निजी दस्तावेज सार्वजनिक होने की आशंका कम होगी और अधिकारियों को भी सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।