वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका-ईरान युद्ध लगातार और गंभीर होता जा रहा है। दोनों देशों के बीच जारी सैन्य तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस अभियान में पहली बार अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक B-1 लांसर लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल किया गया। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब “आंख के बदले आंख” की नीति के तहत दिया जाएगा।
अमेरिका ने कई प्रांतों में किए हवाई हमले
अमेरिकी हमलों में ईरान के खुजेस्तान, बुशेहर, होर्मोजगान और इलाम प्रांतों के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई के दौरान मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम और समुद्री सैन्य क्षमताओं को लक्ष्य बनाया गया।
CENTCOM का दावा है कि इस महीने ईरान के दर्जनों सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की जा चुकी है और समुद्री नाकाबंदी के तहत कई जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित की गई है।
पहली बार मिशन पर भेजा गया B-1 बॉम्बर
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत B-1 लांसर बॉम्बर की तैनाती रही। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा संघर्ष के दौरान पहली बार इस रणनीतिक बमवर्षक का इस्तेमाल किया गया है। यह विमान एक साथ बड़ी संख्या में बम और क्रूज मिसाइलें ले जाने में सक्षम है तथा कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान भरकर सटीक हमला कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि B-1 बॉम्बर की तैनाती से अमेरिका ने ईरान को अपनी सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद भड़का ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उसके पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बना सकता है।
BJP के घेराव के दौरान हिंसा’ कांग्रेस के 12 नेताओं समेत अन्य पर FIR, बोतल-पत्थर फेंकने का आरोप
इस बयान के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान का रक्षा सिद्धांत बिल्कुल स्पष्ट है—”आंख के बदले आंख”। उन्होंने कहा कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब मजबूती और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा तथा ऐसे हमलों में सहयोग करने वाले देशों को भी वैध लक्ष्य माना जाएगा।
अमेरिका के सहयोगी देशों को भी दी चेतावनी
ईरान की सर्वोच्च सैन्य कमान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद मौसवी ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान के बिजली संयंत्रों या पुलों को निशाना बनाया गया तो क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जिनमें बिजली संकट जैसी स्थिति शामिल हो सकती है।
बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव
लगातार जारी हवाई हमलों, कड़े बयानों और नई सैन्य तैनाती के बीच मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।