नई दिल्ली। देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को अधिक सरल, सुरक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारत में 1 अगस्त 2026 से CKYC 2.0 (Central Know Your Customer 2.0) लागू होने की तैयारी है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद ग्राहकों को हर बैंक, बीमा कंपनी या वित्तीय संस्थान में बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या है CKYC 2.0?
CKYC 2.0, भारत के मौजूदा Central KYC Registry का अपग्रेडेड और आधुनिक संस्करण है। इसमें ग्राहक को एक बार KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिसके बाद उसे 14 अंकों का CKYC नंबर जारी किया जाएगा। यही नंबर भविष्य में विभिन्न वित्तीय संस्थानों में पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
बार-बार KYC कराने की जरूरत होगी खत्म
नई व्यवस्था लागू होने के बाद बैंक खाता खोलने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने, बीमा खरीदने या अन्य वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने के लिए हर बार आधार, पैन कार्ड या एड्रेस प्रूफ जैसे दस्तावेज दोबारा जमा नहीं करने होंगे।
ग्राहक की सहमति मिलने पर संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था केंद्रीय डेटाबेस से KYC रिकॉर्ड का उपयोग कर सकेगी।
OTP से होगी डेटा एक्सेस की मंजूरी
CKYC 2.0 में सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। किसी भी संस्था द्वारा ग्राहक का KYC रिकॉर्ड एक्सेस करने से पहले OTP आधारित सहमति ली जाएगी। इससे ग्राहकों का डेटा अधिक सुरक्षित रहेगा और बिना अनुमति कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं कर सकेगा।
पुराने सिस्टम की कमियां होंगी दूर
मौजूदा CKYC सिस्टम में कई रिकॉर्ड अधूरे या पुराने होने के कारण बैंक और बीमा कंपनियां ग्राहकों से बार-बार दस्तावेज मांगती थीं। इसके अलावा डुप्लीकेट एंट्री जैसी समस्याएं भी सामने आती थीं।
CKYC 2.0 में इन कमियों को दूर करते हुए प्रत्येक रिकॉर्ड को कॉन्फिडेंस स्कोर (Confidence Score) दिया जाएगा, जिससे KYC रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और सटीकता बढ़ेगी।
ग्राहकों को क्या होंगे फायदे?
- एक बार KYC कराने के बाद बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं।
- बैंक, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसी सेवाओं में तेजी से ऑनबोर्डिंग।
- OTP आधारित सहमति से डेटा की बेहतर सुरक्षा।
- कागजी कार्रवाई और समय की बचत।
- डुप्लीकेट और पुराने रिकॉर्ड की समस्या से राहत।
- डिजिटल बैंकिंग अनुभव होगा अधिक आसान और पारदर्शी।
CKYC 2.0 के लागू होने से देश की बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं अधिक डिजिटल, सुरक्षित और ग्राहक-केंद्रित बनने की उम्मीद है। यह व्यवस्था ग्राहकों के लिए KYC प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक बनाएगी।