बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में करोड़ों रुपये के कथित बैंक लोन घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। ₹11.38 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में केपेक्स कंपनी की डायरेक्टर सहित अन्य संबंधित लोगों के नाम सामने आए हैं। शुरुआती दौर में कार्रवाई को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड माना जा रहा था, लेकिन बाद में सामने आई एफआईआर के अनुसार यह कार्रवाई CBI द्वारा की गई है। वहीं, आयकर विभाग (IT) ने भी मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है।
शनिवार शाम से रविवार तक चली कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, बलौदाबाजार में कारोबारी राजकुमार सराफ के मकान पर शनिवार शाम से लेकर रविवार शाम तक जांच एजेंसियों की टीम मौजूद रही। लंबी पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के चलते इलाके में दिनभर हलचल बनी रही।
शुरुआत में लोगों ने इसे ईडी की छापेमारी माना, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि यह कार्रवाई CBI द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी। इसके साथ ही आयकर विभाग की टीम ने भी वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।
कैश क्रेडिट का दूसरे लोन चुकाने में इस्तेमाल करने का आरोप
एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि बैंक से लिए गए कैश क्रेडिट (Cash Credit) का उपयोग निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्य के बजाय अन्य बैंकों या वित्तीय संस्थानों के ऋण चुकाने में किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से बैंक को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा।
CBI अब बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन, कंपनी के खातों और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
केपेक्स कंपनी की डायरेक्टर का नाम भी शामिल
जांच में केपेक्स कंपनी की डायरेक्टर का नाम भी सामने आया है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किसकी क्या भूमिका रही और लोन की राशि का वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।
जांच के दौरान कंपनी से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारी खंगाली जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है।
CBI और आयकर विभाग की जांच जारी
CBI इस पूरे मामले में बैंक अधिकारियों, कंपनी प्रबंधन और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका की भी जांच कर रही है। वहीं, आयकर विभाग वित्तीय लेन-देन और कर संबंधी पहलुओं की अलग से पड़ताल कर रहा है।
जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं इस कथित घोटाले में फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी या बैंकिंग नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया।