भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, निजी वाहनों और अन्य साधनों से भोपाल पहुंचे। आंदोलन को लंबा चलाने की तैयारी के साथ किसान अपने साथ अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और लगभग सात दिन का राशन लेकर राजधानी के बाहरी इलाके में सावरकर सेतु के पास डेरा डाले हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
100 प्रतिशत MSP पर खरीद की प्रमुख मांग
आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि प्रदेश में बड़ी मात्रा में मूंग की खेती हुई है, लेकिन सरकारी खरीद सीमित होने से उन्हें अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों की मांग है कि सरकार सभी पात्र किसानों की मूंग की फसल को बिना किसी सीमा के 100 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे, ताकि उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
आंदोलन के चलते सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
किसानों के बड़े जमावड़े को देखते हुए भोपाल में पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। आंदोलन स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है। प्रशासन लगातार आंदोलनकारी किसानों के प्रतिनिधियों से संपर्क बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
स्कूलों में छुट्टी, आमजन को हुई परेशानी
आंदोलन के मद्देनजर एहतियात के तौर पर आसपास के कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। बड़ी संख्या में किसानों के राजधानी पहुंचने के कारण कुछ इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ, जिससे कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और आवश्यक होने पर ही प्रभावित क्षेत्रों की ओर जाने की अपील की है।
सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत की उम्मीद
किसान संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार के सामने रख रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि किसानों के हितों की रक्षा करना है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से भी किसान प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की संभावना जताई जा रही है। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो आंदोलन के समाधान का रास्ता निकल सकता है।