CG POLITICS : ‘बिजली कंपनी को बेचने की तैयारी’ कैबिनेट के फैसले पर कांग्रेस का बड़ा हमला, दीपक बैज ने साय सरकार को घेरा

CG POLITICS : रायपुर, 6 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार के बिजली क्षेत्र से जुड़े हालिया कैबिनेट फैसले को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार पर राज्य की बिजली कंपनियों के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा बिजली कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) करने और बॉन्ड जारी करने का निर्णय भविष्य में निजी निवेश और निजीकरण का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कैबिनेट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की बिजली कंपनियां जनता की संपत्ति हैं और इन्हें निजी हाथों में सौंपने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस विरोध करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वित्तीय सुधारों के नाम पर सार्वजनिक उपक्रमों को धीरे-धीरे निजीकरण की ओर ले जा रही है।

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दीपक बैज ने कहा कि यदि सरकार का उद्देश्य केवल वित्तीय संसाधन जुटाना है, तो उसे जनता के सामने पूरी योजना स्पष्ट करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।

स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग और बॉन्ड जारी करने पर विवाद

कांग्रेस का दावा है कि बिजली कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने और बॉन्ड जारी करने से निजी निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी। विपक्ष का कहना है कि इससे भविष्य में सरकारी नियंत्रण कमजोर हो सकता है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का स्वरूप बदलने की आशंका पैदा होगी।

कांग्रेस नेताओं ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या यह निर्णय केवल पूंजी जुटाने के लिए है या इसके पीछे निजी निवेश को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक योजना भी शामिल है।

सरकार की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान

इस पूरे मामले में राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। सरकार ने अब तक कांग्रेस के आरोपों पर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष नहीं रखा है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार अपनी नीति और उद्देश्य स्पष्ट करती है तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है और विवाद कम हो सकता है।

छत्तीसगढ़ में बिजली हमेशा से राजनीतिक और जनहित का अहम विषय रहा है। बिजली दरों, उत्पादन, वितरण और उपभोक्ता सुविधाओं को लेकर समय-समय पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आते रहे हैं। अब कैबिनेट के इस फैसले के बाद बिजली कंपनियों की संरचना और भविष्य को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

विपक्ष इस मुद्दे को जनहित से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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