दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति का पात्र, छत्तीसगढ़ High Court’ का महत्वपूर्ण फैसला

High Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए वैध और पात्र दावेदार हो सकता है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर ऐसे बेटे को अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसका जन्म कर्मचारी की दूसरी शादी से हुआ है।

अनुकंपा नियुक्ति को लेकर था विवाद

मामला एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार में अनुकंपा नियुक्ति के दावे से जुड़ा था। कर्मचारी के निधन के बाद उसकी दूसरी शादी से जन्मे बेटे ने नियुक्ति के लिए दावा पेश किया था। इस दावे को लेकर परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से आपत्ति सामने आई और मामला न्यायालय तक पहुंचा।

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याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने मामले के तथ्यों और लागू नियमों पर विचार किया। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य और पात्रता के आधार को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

दूसरी शादी से जन्म होने के कारण अधिकार खत्म नहीं

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि कर्मचारी की दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी उसके परिवार का सदस्य है और निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अनुकंपा नियुक्ति का पात्र हो सकता है। केवल उसके जन्म की परिस्थितियों के आधार पर उसे नियुक्ति के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई सामान्य भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के उद्देश्य से दी जाने वाली सहायता है। इसलिए पात्रता का निर्धारण संबंधित नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।

दो बेटे पात्र हों तो बड़े को प्राथमिकता

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण स्थिति पर भी स्पष्टता दी है। यदि एक ही श्रेणी में कर्मचारी के दो बेटे अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हैं और दोनों निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, तो उम्र में बड़े बेटे को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ही पद के लिए पात्र दावेदारों के बीच प्राथमिकता तय करना है। हालांकि, नियुक्ति का अंतिम निर्णय संबंधित विभाग के नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार ही होगा।

अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को अचानक आई आर्थिक कठिनाई से राहत देना है। कोर्ट के इस फैसले से ऐसे मामलों में पात्रता को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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