Raksha Bandhan’ नई दिल्ली। रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। हिंदू परंपरा में किसी भी शुभ कार्य को निर्धारित मुहूर्त में करना विशेष महत्व रखता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के समय को लेकर भी लोगों में विशेष उत्सुकता रहती है।
पहले मुहूर्त में राखी न बांध पाएं तो क्या करें?
कई बार किसी कारण से बहनें बताए गए शुरुआती शुभ समय में भाई को राखी नहीं बांध पाती हैं। ऐसे में चिंता करने की जरूरत नहीं मानी जाती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पहला शुभ समय निकल जाए तो दिन के दूसरे शुभ मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है।
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इसी क्रम में अभिजीत मुहूर्त को भी शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्य सकारात्मक ऊर्जा और मंगलकारी परिणाम प्रदान करते हैं।
अभिजीत मुहूर्त क्यों माना जाता है खास?
हिंदू पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को बेहद शुभ समय माना जाता है। सामान्य तौर पर यह मुहूर्त दोपहर के आसपास आता है और इसकी अवधि स्थान तथा उस दिन के सूर्योदय-सूर्यास्त के समय के आधार पर बदल सकती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे विजय और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए यदि रक्षाबंधन के निर्धारित प्रमुख मुहूर्त में राखी बांधना संभव न हो, तो स्थानीय पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त में यह परंपरा निभाई जा सकती है।
राखी बांधने की धार्मिक मान्यता
रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। इसके साथ बहन भाई के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करती है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया यह धार्मिक कार्य परिवार में सकारात्मकता और आपसी प्रेम बढ़ाता है।
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
राखी बांधने से पहले भाई को तिलक लगाना, अक्षत लगाना और आरती करना परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधकर मिठाई खिलाई जाती है। भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा और सम्मान का वचन देता है।