Purification controversy: ‘यह सिर्फ मेरे पद का मामला नहीं’, शुद्धिकरण विवाद पर खरगे का नड्डा को पत्र

Purification controversy: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी में अपनी रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा है। खरगे ने घटना के 24 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं होने पर गहरी नाराजगी और हैरानी जताई। उन्होंने नड्डा से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देश देकर कथित तौर पर घटना में शामिल संगठन और लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराने की मांग की है।

13 अगस्त को राज्यसभा में उठाया था मामला

खरगे ने अपने पत्र में 13 अगस्त 2026 को राज्यसभा में उठाए गए इस मुद्दे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में उनकी जनसभा के बाद कथित तौर पर मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया। कांग्रेस ने इसे छुआछूत और दलित समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए गंभीर मामला बताया था।

खरगे ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ उनके या कांग्रेस अध्यक्ष के पद से जुड़ा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से संबंधित है। उन्होंने नड्डा को याद दिलाया कि राज्यसभा में उन्होंने इस घटना की जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।

Advertisement

CG Accident : बस और ट्रक में भीषण टक्कर, 15 यात्री घायल, 7 की हालत गंभीर… हादसे के बाद मची अफरा-तफरी

नड्डा ने सदन में की थी घटना की निंदा

खरगे के मुताबिक, राज्यसभा में जेपी नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए कहा था कि भाजपा इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। नड्डा ने मामले को गंभीरता से देखने और जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

खरगे ने अपने पत्र में कहा कि घटना को 24 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक संबंधित संगठन और व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने इसे बेहद निराशाजनक बताते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।

क्या है हल्द्वानी का पूरा मामला?

दरअसल, 8 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा हुई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इसके दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को कार्यक्रम स्थल और मंच का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया।

राहुल गांधी ने भी इस मामले को लेकर भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधा था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि दलित समुदाय से आने वाले खरगे की मौजूदगी के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना जातिगत भेदभाव और छुआछूत का उदाहरण है।

हालांकि, कथित शुद्धिकरण से जुड़े संगठन और स्थानीय लोगों ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई को जातिगत भेदभाव से जोड़ना सही नहीं है।

Spread the love
Advertisement