Pitru Paksha 2026 : नई दिल्ली। पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। पितृ पक्ष में पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल के पेड़ को पवित्र माना जाता है और इसका संबंध भगवान विष्णु, हनुमान जी तथा शनिदेव से भी जोड़ा जाता है। इसी परंपरा के तहत पीपल के 21 पत्तों पर ‘राम नाम’ लिखकर पूजा करने का उपाय प्रचलित है। मान्यता है कि इस उपाय से परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता आती है।
पितृ पक्ष में पीपल के पेड़ की पूजा का महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों और लोक परंपराओं में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में पीपल के पेड़ की पूजा और उसके नीचे दीपक जलाने से पितरों का स्मरण और आराधना की जाती है। कई श्रद्धालु इस दौरान पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करते हैं और अपने पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराएं अलग हो सकती हैं।
CG News : अस्थाई गौठान में 30 मवेशियों की मौत, शव दफनाने का भी आरोप
21 पत्तों पर राम नाम लिखने की परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में पीपल के 21 स्वच्छ और साबुत पत्ते लेकर उन पर लाल चंदन या रोली से ‘राम’ नाम लिखा जाता है। इसके बाद श्रद्धालु इन पत्तों को भगवान हनुमान के समक्ष अर्पित करते हैं या अपनी स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं। मान्यता है कि राम नाम का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है।
हनुमान जी और शनिदेव से जुड़ी मान्यता
धार्मिक कथाओं में भगवान हनुमान को संकटमोचन और शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। लोक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की आराधना करने से भय और कष्टों से मुक्ति की कामना की जाती है। वहीं, पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने और शनिदेव की पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु इस उपाय को शनि संबंधी परेशानियों से राहत की धार्मिक कामना से जोड़ते हैं।
कैसे करें पीपल के 21 पत्तों की पूजा?
-
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-
पीपल के 21 साबुत पत्ते श्रद्धापूर्वक एकत्र करें।
-
प्रत्येक पत्ते पर रोली या चंदन से ‘राम’ नाम लिखें।
-
हनुमान जी का स्मरण करते हुए हनुमान चालीसा या राम नाम का जाप करें।
-
अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पत्ते अर्पित करें और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें।