Delhi Crime Branch Notice: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में तिहाड़ जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों नेताओं को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने उन्हें 22 अक्टूबर को बयान दर्ज कराने के लिए पेश होने का निर्देश दिया है। दोनों नेताओं को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच के कार्यालय में दोपहर 12 बजे बुलाया गया था।
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दर्ज होंगे बयान
दिल्ली क्राइम ब्रांच सौरव दास और आशुतोष रांका से जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी। दोनों नेताओं को मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दोनों नेता पहले ही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। अब क्राइम ब्रांच की ओर से जारी नोटिस के बाद मामले में जांच का एक और पहलू सामने आया है।
7 दिन बाद तिहाड़ जेल से मिली थी जमानत
इससे पहले बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बॉन्ड पर रिहा किया गया।
अदालत में दोनों नेताओं ने लिखित हलफनामा देकर आश्वासन दिया था कि जब तक जंतर-मंतर का क्षेत्र डी-नोटिफाई रहेगा, वे वहां शांति भंग नहीं करेंगे और न ही किसी प्रदर्शन का आह्वान करेंगे।
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दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। पुलिस का तर्क था कि उनके बयानों में विरोधाभास है और इससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो सकती है।
हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से बिना शर्त माफी मांगने और अदालत को दिए गए आश्वासनों को ध्यान में रखते हुए मजिस्ट्रेट ने आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं मानी। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे निर्धारित है।
14 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत निवारक कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया था।
दोनों नेताओं पर प्रतिबंधित और डी-नोटिफाई किए जा चुके जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल पर बिना अनुमति प्रवेश करने और प्रदर्शन करने का आरोप था। साथ ही, उन पर पहले से भरे गए शांति बॉन्ड का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया था।
19 अक्टूबर को दोनों की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सवाल उठाए जाने के बाद उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली थी।