AK-47 cartridges recovered : जम्मू में SIA की छापामारी, कश्मीर टाइम्स कार्यालय से AK-47 कारतूस बरामद, संपादक अनुराधा भसीन पर FIR

AK-47 cartridges recovered AK-47 cartridges recovered
AK-47 cartridges recovered

AK-47 cartridges recovered : जम्मू, 20 नवंबर 2025। जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने गुरुवार को जम्मू स्थित कश्मीर टाइम्स के कार्यालय पर छापामारी की। यह कार्रवाई उन आरोपों की जांच के तहत की गई है, जिनमें अख़बार पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने और देश के खिलाफ असंतोष फैलाने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मामला अभी जांच के अधीन है और सभी आरोप पुलिस के अनुसार प्रारंभिक स्तर के हैं।

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छापे में बरामद हुई संदिग्ध वस्तुएँ

SIA की टीम ने कार्यालय की तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक सामग्रियों को जब्त किया। इनमें शामिल हैं—

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  • AK-47 राइफल के कारतूस

  • पिस्टल के राउंड

  • हैंड ग्रेनेड पिन

  • अन्य दस्तावेज़ एवं डिजिटल सामग्री

एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि इन वस्तुओं की फोरेंसिक जाँच कराई जाएगी ताकि इनके स्रोत और प्रयोजन की पुष्टि की जा सके।

संपादक अनुराधा भसीन के खिलाफ FIR दर्ज

अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।जाँच उन गतिविधियों पर केंद्रित है, जिन्हें शुरुआती रिपोर्टों में देश की संप्रभुता के लिए संभावित खतरा बताया गया है।SIA ने जोर देकर कहा है कि जांच निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी है, और सभी तथ्य रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

जांच का मुख्य फोकस

एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि—

  • क्या ऑफिस में बरामद सामग्री का संबंध किसी आपराधिक नेटवर्क से है?

  • क्या यह सामग्री व्यक्तिगत, संस्थागत या किसी बाहरी स्रोत से लाई गई?

  • क्या अख़बार या उसके किसी कर्मचारी की ऐसी किसी गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका है?

SIA ने बताया कि वह सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले वैज्ञानिक सबूतों का इंतजार किया जाएगा।

मामले ने बढ़ाया राजनीतिक और मीडिया जगत में तनाव

इस कार्रवाई के बाद पत्रकारिता समुदाय और मीडिया संगठनों में चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों ने यह मांग की है कि जांच पारदर्शी हो और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान भी बरकरार रखा जाए। वहीं सुरक्षा एजेंसियाँ दावा कर रही हैं कि यदि कोई संस्था कानून का उल्लंघन करती है, तो जांच होना जरूरी है।

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