Bhupesh Baghel : भूपेश बघेल का तीखा तंज , ज्योतिबा फुले जयंती पर बोले— जब दिग्गजों में ही तालमेल नहीं, तो ‘SIR’ का क्या होगा

Bhupesh Baghel Bhupesh Baghel
Bhupesh Baghel

फुले का मिशन और ‘SIR’ पर सियासी घेराबंदी

भूपेश बघेल ने अपने संबोधन की शुरुआत ज्योतिबा फुले के महिला शिक्षा और दलित उत्थान के कार्यों की सराहना से की। उन्होंने कहा कि फुले ने उस दौर में महिलाओं के लिए स्कूल खोले जब यह कल्पना से परे था। लेकिन भाषण का रुख जल्द ही सियासी हो गया। बघेल ने उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बने SIR (स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन) पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि इस नई व्यवस्था ने राज्य में भ्रम पैदा कर दिया है।

बघेल ने चुटकी लेते हुए कहा, “SIR की इस प्रक्रिया से न तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुश दिख रहे हैं और न ही अखिलेश यादव को यह रास आ रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि जब सरकार चलाने वाले और मुख्य विपक्षी दल के नेता ही संतुष्ट नहीं हैं, तो यह व्यवस्था जनता के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती है? बघेल ने तंज कसा कि यूपी में विकास के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।

महिला शिक्षा और सामाजिक न्याय

बघेल ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि ज्योतिबा फुले का असली संदेश ‘समानता’ था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज के दौर में शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है, जिससे गरीब और वंचित वर्ग पिछड़ता जा रहा है। बघेल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे फुले के दिखाए रास्ते पर चलें और महिलाओं की शिक्षा के लिए जमीनी स्तर पर काम करें।

Advertisement

इस दौरान लखनऊ के स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने बघेल का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने आगामी चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों की झलक भी पेश की। बघेल का यह दौरा यूपी में कांग्रेस की सक्रियता को बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

“जब घर के बड़े (योगी और अखिलेश) ही आपस में सहमत नहीं हैं, तो हम मेहमानों से क्या उम्मीद करते हैं? SIR केवल एक उलझाव बनकर रह गया है।” — भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

भूपेश बघेल का लखनऊ दौरा और ‘SIR’ जैसे तकनीकी-राजनैतिक मुद्दे पर योगी-अखिलेश को घेरना यह दर्शाता है कि कांग्रेस अब यूपी में ‘मौन’ रहने के मूड में नहीं है। 2026 के इस दौर में, जहाँ गठबंधन और क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, बघेल का यह बयान सपा और भाजपा दोनों के बीच की दरार को भुनाने की कोशिश है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव इस पर पलटवार करते हैं या फिर विपक्ष की एकजुटता के नाम पर चुप्पी साध लेते हैं।

Spread the love
Advertisement