बिलासपुर | 7 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा किए जा रहे कथित फर्जीवाड़े को लेकर अभिभावकों का धैर्य जवाब दे गया है। जिले के सैकड़ों अभिभावकों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर को एक ‘खुला पत्र’ लिखा है, जिसमें स्कूल प्रबंधन की मनमानी, फीस वसूली और बोर्ड (CGBSE vs CBSE) के नाम पर किए जा रहे खेल का कच्चा चिट्ठा खोला गया है। अभिभावकों ने सीधे तौर पर प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर इन ‘शिक्षा के सौदागरों’ पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
क्या है पूरा विवाद? CGBSE और CBSE का ‘फर्जीवाड़ा’
अभिभावकों का आरोप है कि शहर के कई नामी स्कूल कागजों पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल (CGBSE) से संबद्ध हैं, लेकिन अभिभावकों से फीस CBSE पैटर्न के नाम पर वसूली जा रही है।
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भ्रामक जानकारी: दाखिले के वक्त बड़े-बड़े बोर्ड और विज्ञापनों में स्कूल को CBSE संबद्ध बताया जाता है, लेकिन परीक्षा के समय बच्चों को गुपचुप तरीके से राज्य बोर्ड के फॉर्म भरवाए जाते हैं।
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अवैध वसूली: CBSE के नाम पर मोटी ट्यूशन फीस, किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर लाखों रुपये ऐंठे जा रहे हैं, जबकि सुविधाएं राज्य बोर्ड के स्तर की भी नहीं दी जा रही हैं।
कलेक्टर को लिखे पत्र के मुख्य बिंदु:
अभिभावकों ने अपने पत्र में प्रशासन से कुछ तीखे सवाल किए हैं:
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कार्रवाई से डर क्यों?: जब स्कूलों की अनियमितताएं जगजाहिर हैं, तो शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन मौन क्यों है?
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संबद्धता की जांच: क्या प्रशासन ने कभी औचक निरीक्षण किया कि स्कूल किस बोर्ड की अनुमति पर चल रहे हैं और किस बोर्ड की किताबें पढ़ा रहे हैं?
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मनमानी फीस: हर साल 10 से 20 प्रतिशत फीस बढ़ाना और अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कब बंद होगा?
अभिभावकों का आक्रोश: “अब चुप नहीं बैठेंगे”
बिलासपुर के सैकड़ों अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर दोषी स्कूलों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई और उनकी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।