छत्तीसगढ़ RTE’ एडमिशन’ कहीं सीटों के लिए मारामारी, तो कहीं खाली रह गए आवेदन

रायपुर: छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार RTE ‘ के तहत निजी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया इस बार एक दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश कर रही है। राज्य के कुल 6861 स्कूलों की 21,698 सीटों के लिए कुल 38,438 आवेदन जमा हुए हैं। लेकिन आंकड़ों की गहराई में जाने पर पता चलता है कि प्रदेश में शिक्षा के अवसरों का वितरण काफी असमान है।

रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में मची होड़

प्रदेश के बड़े शहर—रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर—दाखिले के लिए ‘हॉटस्पॉट’ बने हुए हैं। यहां एक-एक सीट के लिए तीन से चार गुना तक दावेदार मैदान में हैं। कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण इन जिलों के निजी स्कूलों में लॉटरी प्रक्रिया के जरिए ही सीटों का फैसला हो पाएगा।

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11 जिलों में सीटें भरने का संकट

एक ओर जहां शहरों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा है, वहीं दूसरी ओर राज्य के 33 में से 11 जिले ऐसे हैं, जहां सीटों की तुलना में आवेदनों की संख्या काफी कम है। बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ जिलों में हालात चिंताजनक हैं, क्योंकि यहां कई सीटें खाली रहने की नौबत आ गई है।

आंकड़ों की एक झलक

क्षेत्र स्थिति मुख्य बिंदु
कुल सीटें 21,698 पूरे छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में उपलब्ध।
कुल आवेदन 38,438 प्रति सीट औसत दावेदारी 1.77
हॉटस्पॉट रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर सीटों से कई गुना अधिक आवेदन।
पिछड़े जिले बीजापुर, दंतेवाड़ा आवेदनों की संख्या सीटों से भी कम।

व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आवेदनों का यह असंतुलन आरटीई के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है। रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा दिखाती है कि अभिभावक चुनिंदा शहरी स्कूलों की ओर भाग रहे हैं, जबकि आदिवासी और ग्रामीण अंचलों में जागरूकता की कमी या संसाधनों के अभाव के कारण सीटें खाली पड़ी हैं।

“आरटीई का उद्देश्य हर बच्चे को समान शिक्षा देना है, लेकिन जब कुछ जिलों में सीटें ही नहीं भर पा रही हैं, तो यह व्यवस्था के कार्यान्वयन में कमी को दर्शाता है।”

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