खतरनाक रसायनों के बीच मजदूरी: ऐसे हुआ रेस्क्यू
पुलिस को लगातार सूचना मिल रही थी कि औद्योगिक इलाकों के कुछ कारोबारी कम मजदूरी देने के लालच में नाबालिगों से काम ले रहे हैं। शुक्रवार दोपहर पुलिस और एनजीओ की टीम ने रणनीति बनाकर उरला और सिलतरा के चिन्हित कारखानों को चारों तरफ से घेर लिया। छापेमारी के दौरान टीम को देखकर कुछ संचालक भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
रेस्क्यू किए गए बच्चों की उम्र 12 से 16 वर्ष के बीच बताई जा रही है। जांच में पता चला कि इन बच्चों को खतरनाक रसायनों (Chemicals) के सीधे संपर्क में रखा गया था, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक है। उरला पुलिस ने फिलहाल फैक्ट्रियों के मालिकों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) और बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
“हमें सूचना मिली थी कि औद्योगिक क्षेत्रों में बच्चों को बंधक जैसी स्थिति में रखकर काम कराया जा रहा है। हमने दबिश दी और 7 मासूमों को निकाला। संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। किसी भी फैक्ट्री में बाल श्रम बर्दाश्त नहीं होगा।”
— संतोष कुमार, थाना प्रभारी (उरला)
“कारखानों के अंदर का माहौल बहुत डरावना था। छोटे बच्चे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के रसायनों को संभाल रहे थे। यह सीधे तौर पर उनके मानवाधिकारों का हनन है।”
— एनजीओ प्रतिनिधि, रेस्क्यू टीम सदस्य
इस कार्रवाई के बाद रायपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन अब उरला और सिलतरा की सभी छोटी-बड़ी इकाइयों का औचक निरीक्षण करने की योजना बना रहा है।
- बच्चों का पुनर्वास: रेस्क्यू किए गए सभी 7 बच्चों को फिलहाल ‘बाल संप्रेक्षण गृह’ भेजा गया है, जहाँ उनकी काउंसलिंग की जाएगी।
- लाइसेंस रद्द करने की तैयारी: जिला प्रशासन उन कारखानों के ट्रेड लाइसेंस रद्द करने की तैयारी में है जहाँ से बाल मजदूर मिले हैं।
- नागरिकों से अपील: यदि आप अपने आसपास किसी चाय की दुकान, फैक्ट्री या गैरेज में बच्चों को काम करते देखते हैं, तो तुरंत Childline 1098 पर सूचना दें।