Commercial Cylinder Rule : गैस कार्ड के बिना चूल्हा जलना मुश्किल! पेट्रोलियम कंपनियों ने बदला कमर्शियल सिलेंडर का डिलीवरी सिस्टम

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  • नया नियम: अब कमर्शियल सिलेंडर पाने के लिए उपभोक्ताओं को गैस एजेंसी में विशेष ‘कोड’ के लिए आवेदन करना होगा।
  • कोटा सिस्टम: होटल और रेस्टोरेंट को केवल 20 फीसदी, जबकि अस्पतालों और स्कूलों को 100 फीसदी आपूर्ति मिलेगी।
  • बुकिंग प्रोसेस: बिना आधिकारिक गैस कोड के सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी पूरी तरह बंद कर दी गई है।

नई दिल्ली/रायपुर — पेट्रोलियम और गैस कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के वितरण को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को तत्काल डिमांड पर सिलेंडर नहीं मिलेगा। गैस कंपनियों ने ‘गैस कोड’ सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। यानी, अब गैस एजेंसी के चक्कर काटे बिना और निर्धारित शुल्क जमा किए बिना कमर्शियल सप्लाई चेन से जुड़ना नामुमकिन होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

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प्रायोरिटी डिलीवरी और सप्लाई कैप: क्या है नया आदेश?

कंपनियों ने सप्लाई चैन को नियंत्रित करने के लिए संस्थागत कोटा निर्धारित किया है। पहले मांग के आधार पर तत्काल डिलीवरी हो जाती थी, लेकिन अब सरकार और कंपनियों ने इसे प्राथमिकता श्रेणियों में बांट दिया है। इसका सीधा असर छोटे होटल संचालकों पर पड़ेगा जिन्हें अब अनिवार्य पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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  • होटल एवं रेस्टोरेंट: इन्हें कुल सप्लाई का केवल 20% हिस्सा ही आवंटित किया जाएगा।
  • अर्धशासकीय संस्थाएं: इन संस्थानों को 50% कोटा दिया गया है।
  • अति-आवश्यक सेवाएं: अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों को 100% निर्बाध आपूर्ति मिलती रहेगी।

उपभोक्ताओं को अब अपनी संबंधित गैस एजेंसी में जाकर फॉर्म भरना होगा और आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ शुल्क जमा करना होगा। कोड जनरेट होने के बाद ही भविष्य में बुकिंग स्वीकार की जाएगी।

“यह कदम कालाबाजारी रोकने और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए उठाया गया है। बिना कोड के हम यह ट्रैक नहीं कर पा रहे थे कि कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग कहां हो रहा है। अब हर सिलेंडर का हिसाब होगा।”
— क्षेत्रीय प्रबंधक, पेट्रोलियम एवं गैस कॉर्पोरेशन

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