- बड़ा धमाका: बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में विधायकों की संख्या 300 या उससे अधिक होने वाली है।
- पावर सेंटर: उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र सांसदों की संख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा ‘खिलाड़ी’ बनकर उभरेगा।
- कैपिटल अपडेट: देश की राजधानी दिल्ली में विधायकों का आंकड़ा 105 और सांसदों की संख्या 11 तक पहुँच जाएगी।
Delimitation 2026 New Update , नई दिल्ली — भारत के राजनीतिक नक्शे पर ‘सीटों का खेल’ अब एक नए रोमांचक मोड़ पर है। जनसंख्या के ताजा आंकड़ों के आधार पर होने वाले परिसीमन ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यह बदलाव केवल संख्याओं का नहीं है, बल्कि देश के नीति-निर्माण में राज्यों की हिस्सेदारी का नया फॉर्मूला है। इस नए ‘प्लेबुक’ के लागू होते ही कई राज्यों की विधानसभाओं का कद इतना बढ़ जाएगा कि वहां का मैनेजमेंट संभालना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा।
राज्यों का ‘स्क्वाड’ विस्तार: 300 पार होगा विधायकों का आंकड़ा
परिसीमन के बाद कई राज्यों की विधानसभाएं अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ी और भारी-भरकम नजर आएंगी। दक्षिण से लेकर उत्तर तक, सीटों के बंटवारे में जनसंख्या की बढ़त साफ दिखाई दे रही है।
- 300+ क्लब: बिहार के साथ अब राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु जैसे दिग्गज राज्य इस एलीट ग्रुप में शामिल होंगे।
- महाराष्ट्र का दबदबा: लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा ‘स्ट्राइक रेट’ अब महाराष्ट्र का होगा। वहां सांसदों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया जाएगा।
- दिल्ली की नई स्ट्रेंथ: केंद्र शासित प्रदेश होने के बावजूद दिल्ली में अब 105 विधायक होंगे। साथ ही, संसद में भी दिल्ली के 11 प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों की इस बढ़त से क्षेत्रीय मुद्दों को केंद्र में ज्यादा जगह मिलेगी। हालांकि, ज्यादा संख्या का मतलब ज्यादा कॉम्पिटिशन भी है, जिससे टिकट वितरण और गठबंधन की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिलेंगे।
“परिसीमन लोकतंत्र की जरूरत है ताकि हर नागरिक का प्रतिनिधित्व बराबर हो। बिहार, राजस्थान और एमपी जैसे राज्यों में विधायकों की संख्या 300 पार होना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक विकेंद्रीकरण अब अनिवार्य है। दिल्ली में 105 विधायकों का होना छोटे क्षेत्रों की समस्याओं को बेहतर ढंग से उठाने में मदद करेगा।”
— डॉ. विकास आहूजा, चुनावी रणनीतिकार