Gautam Gambhir : हेड कोच बनने के लिए तैयार नहीं थे गौतम गंभीर, फिर कैसे जय शाह ने मनाया? राज से उठा पर्दा

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। गंभीर ने बताया कि जब उन्हें टीम इंडिया का कोच बनने का प्रस्ताव मिला था, तो वह इसके लिए मानसिक रूप से बिल्कुल तैयार नहीं थे। न्यूज़ एजेंसी के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान गंभीर ने उस सुबह का जिक्र किया जब तत्कालीन बीसीसीआई सचिव (अब ICC चेयरमैन) जय शाह के एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया।

मुंबई के होटल में आया था वो ‘सुबह का कॉल’

गंभीर ने बताया कि यह वाकया आईपीएल 2024 के दौरान का है। उस समय वह कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के मेंटर थे। गंभीर ने कहा:

LPG Crisis India : Panic Booking पर लगाम 15-20% बढ़ी गैस की डिमांड को देखते हुए सरकार ने बढ़ाया बुकिंग का गैप, जमाखोरी करने वालों पर होगी जेल

Advertisement

“हम मुंबई में मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच खेलने के लिए सेंट रेजिस होटल में ठहरे हुए थे। सुबह-सुबह जय भाई का फोन आया। उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास तुम्हारे लिए एक ऑफर है और तुम मुझे इसके लिए ‘ना’ नहीं कह सकते।”

गंभीर के मुताबिक, जब जय शाह ने उन्हें हेड कोच का पद ऑफर किया, तो वह सन्न रह गए। उन्होंने स्वीकार किया कि वह उस समय इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं थे और यह उनके लिए एक ‘बड़ा सरप्राइज’ था।

जय शाह की वो बात: “तुम मना नहीं कर सकते”

गंभीर ने बताया कि उनके पास किसी भी टीम या फ्रेंचाइजी का हेड कोच रहने का अनुभव नहीं था, वह सिर्फ मेंटर की भूमिका निभा रहे थे। लेकिन जय शाह ने उन पर अटूट भरोसा जताया। जय शाह ने स्पष्ट कर दिया था कि देश की सेवा के लिए उन्हें यह जिम्मेदारी संभालनी ही होगी।

इसके बाद गंभीर ने अपनी पत्नी नताशा और परिवार से सलाह ली और अंततः टीम इंडिया का हेड कोच बनने के लिए अपनी सहमति दी।

मुश्किल दौर में बने रहे ‘पिलर ऑफ सपोर्ट’

हाल ही में टीम इंडिया द्वारा T20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद गंभीर ने जय शाह का आभार जताते हुए कहा कि जब टीम न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज हारी थी, तब जय शाह ही एकमात्र व्यक्ति थे जिन्होंने उन्हें फोन कर ‘मजबूत बने रहने’ का हौसला दिया था।

गंभीर ने कहा:

  • “जब चीजें अच्छी नहीं चल रही थीं, तब जय भाई मेरे साथ खड़े रहे।”

  • “बिना किसी पूर्व कोचिंग अनुभव के मुझ पर इतना बड़ा दांव खेलना जय भाई का साहस था।”

Spread the love
Advertisement