- बड़ा फैसला: जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने देवेंद्र डडसेना की जमानत अर्जी को सिरे से नकार दिया।
- सख्त टिप्पणी: कोर्ट ने साफ किया कि आर्थिक अपराधों में जमानत के लिए ‘स्पेशल डिफेंस’ और सावधानी जरूरी है।
- चार्जशीट का वजन: मामला IPC की धारा 384, 420, 120-बी, 467, 468, 471 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़ा है।
Illegal Coal Transportation Extortion , बिलासपुर — छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित कोयला लेवी घोटाले की पिच पर आज एक बड़ा विकेट गिरा है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने आरोपी देवेंद्र डडसेना को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने कानूनी दलीलों को सुनने के बाद डडसेना की जमानत याचिका को ‘क्लीन बोल्ड’ कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब मामला करोड़ों के आर्थिक घोटाले और सिंडिकेट से जुड़ा हो, तो नरमी की गुंजाइश कम हो जाती है।
मैदान पर कानूनी घेराबंदी: ED और ACB की संयुक्त ‘फील्डिंग’
यह मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन पर अवैध वसूली के उस बड़े नेटवर्क का है जिसका खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने किया था।
- गंभीर धाराएं: आरोपी पर धोखाधड़ी (420), जालसाजी (467/468) और आपराधिक साजिश (120-बी) जैसे गंभीर ‘फाउल’ दर्ज हैं।
- ED की जांच का बेस: ईडी ने अपनी जांच में पाया कि राज्य में कोयले की ढुलाई के लिए एक समानांतर वसूली तंत्र चलाया जा रहा था।
- EOW का एक्शन: एंटी करप्शन ब्यूरो और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने इस घोटाले में पुख्ता सबूत पेश किए हैं, जिससे आरोपी का डिफेंस कमजोर पड़ गया।
जस्टिस व्यास ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक अपराध समाज की नींव को हिला देते हैं। ऐसे मामलों में आरोपियों को बेल देना जांच की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
“आर्थिक अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं। ऐसे मामलों में साक्ष्यों की प्रकृति और अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने में विशेष सावधानी बरतना अनिवार्य है।”
— जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास, बिलासपुर हाई कोर्ट